कुरान - 51:42 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
مَا تَذَرُ مِن شَيۡءٍ أَتَتۡ عَلَيۡهِ إِلَّا جَعَلَتۡهُ كَٱلرَّمِيمِ

Transliteration: (Maa tazaru min shai'in atat 'alaihi illaa ja'alat hu karrameem)

वह जिस चीज़ पर भी गुज़रती थी [47], उसे सड़ी-गली हड्डी (या भुस) की तरह बना देती थी! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 42

"वह जिस चीज़ पर भी गुज़रती थी [47], उसे सड़ी-गली हड्डी (या भुस) की तरह बना देती थी!"


[47] गुनाहों की नहूसत और आम बर्बादी

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • उस तेज़ आंधी ने इंसानों, जानवरों, मकानात और बागात हर चीज़ को सड़ी-गली हड्डियों और चूरा-चूरा भुस की तरह कर दिया।
  • इंसानों के गुनाहों की वजह से सिर्फ़ इंसान ही नहीं बल्कि उनकी बस्तियों के बेज़बान जानवर और नबातात भी तबाह हो जाते हैं—'गेहूँ के साथ घुन भी पिसता है'।

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