कुरान - 51:44 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
فَعَتَوۡاْ عَنۡ أَمۡرِ رَبِّهِمۡ فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلصَّـٰعِقَةُ وَهُمۡ يَنظُرُونَ

Transliteration: (Fa'ataw 'an amri Rabbihim fa akhazat humus saa'iqatu wa hum yanzuroon)

मगर उन्होंने अपने रब के हुक्म से सरकशी की, तो देखते ही देखते उन्हें एक कड़कती बिजली (साइक़ा) [50] ने आ पकड़ा! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 44

"मगर उन्होंने अपने रब के हुक्म से सरकशी की, तो देखते ही देखते उन्हें एक कड़कती बिजली (साइक़ा) [50] ने आ पकड़ा!"


[50] हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) की ख़ौफ़नाक चीख़ (साइक़ा)

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'साइक़ा' से मुराद हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) की वह दहला देने वाली हैबतनाक आवाज़ (चीख़) थी जिसकी शिद्दत से उन ज़ालिमों के कलेजे और दिल फट गए और वे अपनी आँखों से अपनी हलाकत देखते रहे।

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