कुरान - 51:46 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
وَقَوۡمَ نُوحٖ مِّن قَبۡلُۖ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَوۡمٗا فَٰسِقِينَ

Transliteration: (Wa qawma Noohim min qablu innahum kaano qawman faasiqeen)

और उनसे पहले हमने नूह की क़ौम को हलाक किया। बेशक वे नाफ़रमान लोग थे [52]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 46

"और उनसे पहले हमने नूह की क़ौम को हलाक किया। बेशक वे नाफ़रमान लोग थे [52]!"


[52] क़ौम-ए-नूह का तूफ़ान में ग़र्क़ होना

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम ने साढ़े नौ सौ साल की मुसलसल दावत के बावजूद नाफ़रमानी की, चुनाँचे अल्लाह तआला ने उन्हें अज़ीम तूफ़ान में ग़र्क़ कर के दुनिया से मिटा दिया।

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