कुरान - 51:45 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
فَمَا ٱسۡتَطَٰعُواْ مِن قِيَامٖ وَمَا كَانُواْ مُنتَصِرِينَ

Transliteration: (Famas tataa'oo min qiyaaminw wa maa kaanoo muntasireen)

पस न तो वे खड़े हो सके और न ही बदला ले सके [51]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 45

"पस न तो वे खड़े हो सके और न ही बदला ले सके [51]!"


[51] कुफ़्फ़ार की बेबसी और क़ुदरत का ग़ल्बा

अज़ाब के आते ही उनकी तमाम ताक़त ख़ाक में मिल गई; वे न तो अपनी जगह से उठ सके, न भाग सके, और न ही हज़रत सालेह या हज़रत जिब्रील से कोई बदला ले सके। जब इलाही अज़ाब आता है तो मख़लूक़ पूरी तरह बेबस हो जाती है।

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