Transliteration: (Famas tataa'oo min qiyaaminw wa maa kaanoo muntasireen)
"पस न तो वे खड़े हो सके और न ही बदला ले सके [51]!"
अज़ाब के आते ही उनकी तमाम ताक़त ख़ाक में मिल गई; वे न तो अपनी जगह से उठ सके, न भाग सके, और न ही हज़रत सालेह या हज़रत जिब्रील से कोई बदला ले सके। जब इलाही अज़ाब आता है तो मख़लूक़ पूरी तरह बेबस हो जाती है।
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