कुरान - 51:48 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

48
وَٱلۡأَرۡضَ فَرَشۡنَٰهَا فَنِعۡمَ ٱلۡمَٰهِدُونَ

Transliteration: (Wal arda farashnaahaa fani'mal maahidoon)

और ज़मीन को हमने बिछाया, तो हम क्या ही ख़ूब बिछाने वाले हैं [54]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 48 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 48

"और ज़मीन को हमने बिछाया, तो हम क्या ही ख़ूब बिछाने वाले हैं [54]!"


[54] ज़मीन का मुअतदिल बिछौना

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह ने ज़मीन को ऐसा बनाया कि गोल होने के बावजूद यह फ़र्श की तरह हमवार मालूम होती है; यह न लोहे की तरह सख़्त है कि मकान और खेती न हो सके, और न पानी की तरह पतली कि पैर धँस जाएँ, बल्कि ज़िंदगी गुज़ारने के लिए निहायत मुनासिब और मुअतदिल है।

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