कुरान - 51:50 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
فَفِرُّوٓاْ إِلَى ٱللَّهِۖ إِنِّي لَكُم مِّنۡهُ نَذِيرٞ مُّبِينٞ

Transliteration: (Fafirrooo ilal laahi innee lakum minhu nazeerum mubeen)

पस अल्लाह की तरफ़ दौड़ो [57]! बेशक मैं उसकी तरफ़ से तुम्हारे लिए खुला डर सुनाने वाला (रसूल) हूँ [58]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 50

"पस अल्लाह की तरफ़ दौड़ो [57]! बेशक मैं उसकी तरफ़ से तुम्हारे लिए खुला डर सुनाने वाला (रसूल) हूँ [58]!"


[57] 'फ़-फ़िर्रू इलल्लाह' (अल्लाह की तरफ़ दौड़ो)

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इसका मक़सद यह है कि दुनिया की फ़ानी लज़्ज़तों, गुनाहों और ग़फ़लत को छोड़कर अल्लाह की इताअत, तौबा और उसकी रज़ा की तरफ़ तेज़ी से दौड़ो।


[58] हुज़ूर अकरम ﷺ की तरफ़ दौड़ना ही अल्लाह की तरफ़ दौड़ना है

  • हुज़ूर अकरम ﷺ अल्लाह की तरफ़ से खुले नज़ीर और रहनुमा हैं।
  • हुज़ूर ﷺ की बारगाह में पनाह लेना और आपकी सुन्नत की पैरवी करना हक़ीक़त में अल्लाह की तरफ़ दौड़ना है, जैसा कि क़ुरआन में फ़रमाया गया: "व लौ अन्नहुम इज़ ज़लमू अनफ़ुसहूम जाउका..." (सूरह निसा, आयत 64)।

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