कुरान - 51:36 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
فَمَا وَجَدۡنَا فِيهَا غَيۡرَ بَيۡتٖ مِّنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ

Transliteration: (Famaa wajadnaa feehaa ghaira baitim minal muslimeen)

मगर हमने वहाँ (मुसलमानों का) सिर्फ़ एक ही घर [38] पाया! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 36

"मगर हमने वहाँ (मुसलमानों का) सिर्फ़ एक ही घर [38] पाया!"


[38] हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) का मुबारक घराना

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • फ़रिश्तों ने जब उस सरकश बस्ती में ईमान वालों की तलाश की, तो पूरी बस्ती में सिर्फ़ एक ही घर ईमान वालों का मिला—यानी हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) और उनकी साहिबज़ादियों का घर (उनकी बीवी काफ़िरा थी जो हलाक हुई)।
  • बीस साल की मुसलसल तबलीग़ के बावजूद सिर्फ़ चंद लोग ही ईमान लाए थे। यह वाक़िआ दिखाता है कि अक्सरियत का इनकार नबी की हक़्क़ानियत में कोई कमी नहीं करता।

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