कुरान - 33:11 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
هُنَالِكَ ٱبۡتُلِيَ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ وَزُلۡزِلُواْ زِلۡزَالٗا شَدِيدٗا

Transliteration: (Hunaalikab tuliyal mu'minoona wa zulziloo zilzaalan shadeedaa)

उस मक़ाम पर मोमिन आज़माए गए और बड़े सख़्त झिंझोड़ [26] (ज़लज़ले) से हिला दिए गए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 11

"उस मक़ाम पर मोमिन आज़माए गए और बड़े सख़्त झिंझोड़ [26] (ज़लज़ले) से हिला दिए गए।"

[26] जंगे ख़ंदक़ में ईमान की आज़माइश

यह आयत-ए-मुबारका जंगे ख़ंदक़ के दौरान अहले ईमान पर आने वाली शदीद आज़माइश की तरफ़ इशारा करती है। बाहर से दुश्मनों के लश्करों का मुहासिरा और अंदर से मदीना के यहूदियों की ग़द्दारी के सबब मुसलमान निहायत नाज़ुक हालात में थे। उनके महदूद अस्बाब व वसाइल, सामान की क़िल्लत, और दुश्मन की ज़बरदस्त ताक़त ऐसे अवामिल थे जिन्होंने दिलों को हिला कर रख दिया था।

इसके बावजूद हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ के जाँनिसार सहाबा ने उन संगीन हालात में भी बे-मिसाल सब्र और साबित-क़दमी का मुज़ाहरा फ़रमाया। इस सख़्त इम्तिहान में उनकी अटूट वफ़ादारी और इस्तक़ामत उनके कामिल ईमान और अक़ीदत का रौशन सुबूत बन गई।

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