कुरान - 33:10 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
إِذۡ جَآءُوكُم مِّن فَوۡقِكُمۡ وَمِنۡ أَسۡفَلَ مِنكُمۡ وَإِذۡ زَاغَتِ ٱلۡأَبۡصَٰرُ وَبَلَغَتِ ٱلۡقُلُوبُ ٱلۡحَنَاجِرَ وَتَظُنُّونَ بِٱللَّهِ ٱلظُّنُونَا۠

Transliteration: (Iz jaaa'ookum min fawqikum wa min asfala minkum wa iz zaaghatil absaaru wa balaghatil quloobul hanaajira wa tazunnoona billaahiz zunoonaa)

जब वे तुम्हारे ऊपर से और तुम्हारे नीचे से [23] तुम पर चढ़ आए, और जब आँखें पथरा गईं और कलेजे मुंह को आ गए [24], और तुम अल्लाह के बारे में तरह-तरह के गुमान करने लगे थे [25]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 10

"जब वे तुम्हारे ऊपर से और तुम्हारे नीचे से [23] तुम पर चढ़ आए, और जब आँखें पथरा गईं और कलेजे मुंह को आ गए [24], और तुम अल्लाह के बारे में तरह-तरह के गुमान करने लगे थे [25]।"

[23] चारों तरफ़ से दुश्मन का घेराव

बनू गतफ़ान, नज्द और असद के काफ़िरों के साथ मदीना मुनव्वरा के ऊपरी (मशरिक़ी/पूर्वी) हिस्से से चढ़ आए, जिनकी क़ियादत ऐनिय्या इब्ने हिस्न और आमिर इब्ने तुफ़ैल कर रहे थे, और यहूदी उनकी मदद कर रहे थे। दूसरी तरफ़ क़ुरैश और बनू किनाना अबू सुफ़ियान की सरबराही में निचले (मग़रिबी/पश्चिमी) हिस्से से आए। यूँ मदीना मुनव्वरा दोनों जानिब से मुहासिरे में आ गया।

[24] मुहासिरा और ख़ंदक़ की आज़माइश

यह वाक़िआ शव्वाल 4 हिजरी (या 5 हिजरी) में जंगे ख़ंदक़ के दौरान पेश आया, जब बनू नज़ीर को उनकी बद-अहदी की वजह से जिलावतन किया गया था। इन यहूदियों ने क़ुरैश और दूसरे क़बीलों को मुसलमानों पर हमले के लिए उकसाया। हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ियल्लाहु अन्हु) के मशविरे पर अमल करते हुए हुज़ूर ﷺ ने सहाबा-ए-किराम के साथ मिलकर ख़ंदक़ खोदी—जो अहले अरब के लिए एक बिल्कुल नई जंगी हिकमते अमली थी—जिसने दुश्मन को हैरान कर दिया। दुश्मन के बारह हज़ार के लश्कर-ए-जर्रार को ख़ंदक़ ने रोक दिया। उन्होंने 24 दिन तक मदीने का मुहासिरा रखा, जिससे मुसलमानों को शदीद तकलीफ़ और आज़माइश का सामना करना पड़ा। मगर अल्लाह तआला ने दुश्मन के लश्कर पर तूफ़ानी आंधी, शदीद सर्दी और तारीकी भेज दी—जिसने उनके ख़ेमे उखाड़ फेंके, मवेशी भगा दिए और फ़रिश्तों के ज़रिये उनके दिलों में रोब डाल दिया। काफ़िर माल व अस्बाब छोड़कर भाग खड़े हुए, जिसे मुसलमानों ने माले ग़नीमत के तौर पर हासिल किया।

[25] आज़माइश और इंतिहा-ए-ख़ौफ़ का लम्हा

मुसलमान चारों तरफ़ से घिरे हुए थे और तादाद में बहुत कम थे, जिससे उन पर शदीद ख़ौफ़ और बेचैनी तारी हो गई। उनकी आँखें पथरा गईं, कलेजे मुंह को आ गए, और तरह-तरह के ख़दशात पैदा होने लगे। अलबत्ता यह घबराहट एक फ़ितरी इंसानी जज़्बा थी, अल्लाह के वादे में कोई शक या कुफ़्र नहीं था। इसीलिए अल्लाह तआला ने उन पर कोई इताब नहीं फ़रमाया, बल्कि इस अज़ीम आज़माइश में उनके सब्र और साबित-क़दमी की तारीफ़ फ़रमाई।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now