Transliteration: (Liyas'alas saadiqeena 'an sidqihim; wa a'adda lilkaa fireena 'azaaban aleemaa (section 1))
"ताकि वह सच्चों से उनकी सच्चाई के बारे में पूछे [20]; और उसने काफ़िरों के लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है।"
इस बाज़पुर्स (पूछताछ) से मुराद यह है कि अल्लाह तआला अंबिया-ए-किराम से या उन लोगों से जिन्होंने उनकी तस्दीक़ की थी, अहद पूरा करने के बारे में सवाल फ़रमाएगा। इसका एक मफ़हूम यह भी है कि अल्लाह तआला अंबिया से उनकी क़ौमों के रवैये के बारे में पूछेगा, यानी जब उन्हें पैग़ाम-ए-इलाही पहुँचाया गया तो काफ़िरों ने क्या जवाब दिया था।
दोनों सूरतों में, यह हक़ पहुँचाने की अज़मत और हक़ सुनने वालों की जवाबदेही को उजागर करता है, ख़्वाह उन्होंने इसे क़बूल किया हो या इंकार किया हो। जहाँ तक काफ़िरों का तअल्लुक़ है, हक़ की मुसलसल नाफ़रमानी और इंकार की वजह से उनके लिए पहले ही दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा गया है।
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