Transliteration: (Wa iz akhaznaa minan Nabiyyeena meesaaqahum wa minka wa min Noohinw wa Ibraaheema wa Moosaa wa Eesab-ni-Maryama wa akhaznaa minhum meesaaqan ghaleezaa)
"और (ऐ महबूब!) याद कीजिए जब हमने पैग़म्बरों से अहद लिया [18], और आपसे, और नूह, इब्राहीम, मूसा और ईसा इब्ने मरयम से; और हमने उनसे [19] बहुत पक्का अहद लिया था;"
हमारे प्यारे नबी ﷺ से किसी दूसरे नबी की इताअत का कोई अहद नहीं लिया गया; बल्कि तमाम दीगर अंबिया से हुज़ूर ﷺ पर ईमान लाने और आपकी नुसरत करने का अहद लिया गया। यह साबित करता है कि आप ﷺ आख़िरी और सबसे अफ़ज़ल रसूल हैं। अल्लाह ही बेहतर जानता है कि आख़िर में कौन तशरीफ़ लाएगा, और वह हुज़ूर नबी-ए-पाक ﷺ की ज़ात-ए-मुबारक है।
यहाँ "अहद" से मुराद तब्लीग़ का मीसाक़ है। यह एक आम अहद था जो तमाम अंबिया से अहकाम-ए-इलाही पहुँचाने के लिए लिया गया, और एक ख़ास अहद हुज़ूर ﷺ से लिया गया कि आप बिला झिझक हर इलाही हुक्म को पहुँचाएं और तमाम मख़लूक़ को तौहीद की दावत दें।
इससे मुराद या तो:
वही तब्लीग़ का अहद है, जिसे ताकीद के लिए दोबारा ज़िक्र फ़रमाया गया, जिसमें हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ भी शामिल हैं, या फिर
हुज़ूर ﷺ की नुसरत व इताअत का ख़ास अहद है, जो दीगर तमाम अंबिया से लिया गया था। इस सूरत में "पैग़म्बरों" से मुराद हुज़ूर ﷺ के अलावा बाक़ी तमाम अंबिया हैं।
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