कुरान - 33:16 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
قُل لَّن يَنفَعَكُمُ ٱلۡفِرَارُ إِن فَرَرۡتُم مِّنَ ٱلۡمَوۡتِ أَوِ ٱلۡقَتۡلِ وَإِذٗا لَّا تُمَتَّعُونَ إِلَّا قَلِيلٗا

Transliteration: (Qul lany yanfa'akumul firaaru in farartum minal mawti awil qatli wa izal laa tumatta'oona illaa qaleelaa)

आप फ़रमा दीजिए, 'अगर तुम मौत या क़त्ल से भागते हो, तो यह भागना तुम्हें कोई नफ़ा न देगा; और उस सूरत में भी तुम बहुत थोड़ी सी मुद्दत ही दुनियावी फ़ायदा उठा सकोगे [36]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 16

"आप फ़रमा दीजिए: 'अगर तुम मौत या क़त्ल से भागते हो, तो यह भागना तुम्हें कोई नफ़ा न देगा; और उस सूरत में भी तुम बहुत थोड़ी सी मुद्दत ही दुनियावी फ़ायदा उठा सकोगे' [36]।"

[36] मौत और जिहाद से भागने की बे-फ़ायदगी

यह आयत उन मुनाफ़िक़ों और बुज़दिलों की ज़हनियत का रद्द फ़रमाती है जो मौत या शहादत के डर से जिहाद से भाग खड़े हुए या भागने का इरादा रखते थे। यह वाज़ेह फ़रमाती है कि मैदान छोड़कर भागना उन्हें कोई हक़ीक़ी नफ़ा नहीं पहुँचा सकता। अगर मौत आज मुक़द्दर में लिखी है, तो वह ज़रूर वाक़े होकर रहेगी, और अगर नहीं लिखी, तो वह सिर्फ़ चंद रोज़ के लिए मुअख़्ख़र (टली) है।

भागने से वे सिर्फ़ जिहाद छोड़ने का संगीन गुनाह अपने सर ले रहे हैं, और जिस दुनियावी ज़िंदगी को वे बचाने की कोशिश कर रहे हैं उसकी भी कोई ख़ास मुद्दत या वक़ार नहीं। लिहाज़ा यह आयत चंद रोज़ा और बे-यक़ीनी दुनियावी ज़िंदगी की ख़ातिर दायमी निजात और शहादत की अज़ीम इज़्ज़त को क़ुर्बान कर देने की नादानी और हिमाक़त को पूरी तरह बे-नक़ाब करती है।

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