Transliteration: (Laqad kaana lakum fee Rasoolil laahi uswatun hasanatul liman kaana yarjul laaha wal yawmal Aakhira wa zakaral laaha kaseeraa)
"बेशक तुम्हारे लिए रसूलुल्लाह (की पैरवी) [51] में एक बेहतरीन नमूना है उस शख़्स के लिए जो अल्लाह और यौमे आख़िरत की उम्मीद रखता है और कसरत से अल्लाह का ज़िक्र करता है [52]।"
हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ की पूरी हयाते तय्यिबा तमाम कायनात के लिए एक जामेअ और मुकम्मल नमूना-ए-हयात है, जिसका कोई गोशा भी ख़ारिज नहीं। आपकी मुबारक ज़िंदगी अल्लाह की क़ुदरत और रहमत का कामिल मज़हर है, और आपके नक़्शे क़दम की पैरवी ही हक़ीक़ी कामियाबी का वाहिद रास्ता है। ख़्वाह जीना हो या मरना, सोना हो या जागना, अगर इंसान अपने आमाल को हुज़ूर ﷺ की सुन्नत के मुताबिक़ ढाल ले, तो उसके तमाम दुनियावी आमाल भी इबादत बन जाते हैं।
एक कामिल और मुकम्मल नमूने की पाँच बुनियादी सिफ़ात होती हैं:
वह हर ऐतबार से मुकम्मल और कामिल हो
हर ऐब, नुक्स और आलूदगी से पाक हो
खुले तौर पर सबके सामने पेश किया गया हो
उसका बनाने वाला (ख़ालिक़) ख़ुद उसकी तारीफ़ फ़रमाए
अगर कोई उसमें नुक्स निकाले तो उसका बनाने वाला नाख़ुश हो
ये तमाम कमाल की सिफ़ात हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की पाकीज़ा सीरत और मुबारक किरदार में ब-दरजए अतम मौजूद हैं।
उलमा-ए-किराम फ़रमाते हैं कि जिस मोमिन में ये तीन सिफ़ात मौजूद हों:
हुज़ूर नबी-ए-पाक ﷺ की मुकम्मल इताअत व फ़रमांबरदारी
अल्लाह तआला की ज़ात और यौमे आख़िरत पर कामिल उम्मीद व यक़ीन
अल्लाह तआला का कसरत से ज़िक्र करना
वह दुनिया और आख़िरत दोनों जहाँ में दिली राहत और सुकून पाएगा। ऐसा शख़्स मुसीबत में सब्र और राहत में शुक्र की दौलत हासिल करता है, जिससे वह रूहानी सुकून और दायमी कामियाबी से हमकनार होता है।
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