कुरान - 33:22 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
وَلَمَّا رَءَا ٱلۡمُؤۡمِنُونَ ٱلۡأَحۡزَابَ قَالُواْ هَٰذَا مَا وَعَدَنَا ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥ وَصَدَقَ ٱللَّهُ وَرَسُولُهُۥۚ وَمَا زَادَهُمۡ إِلَّآ إِيمَٰنٗا وَتَسۡلِيمٗا

Transliteration: (Wa lammaa ra al mu'minoonal Ahzaaba qaaloo haazaa maa wa'adanal laahu wa Rasooluh; wa sadaqal laahu wa Rasooluh; wa maa zaadahum illaaa eemaananw wa tasleemaa)

और जब मोमिनों ने (काफ़िरों के) लश्करों को देखा, तो कहा, 'यह वही है जिसका अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे वादा किया था [53], और अल्लाह और उसके रसूल ने सच फ़रमाया था;' और इस बात ने उनके ईमान और (अल्लाह की रज़ा के आगे) फ़रमांबरदारी [54] को और ज़्यादा बढ़ा दिया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 22

"और जब मोमिनों ने (काफ़िरों के) लश्करों को देखा, तो कहा: 'यह वही है जिसका अल्लाह और उसके रसूल ने हमसे वादा किया था [53], और अल्लाह और उसके रसूल ने सच फ़रमाया था;' और इस बात ने उनके ईमान और फ़रमांबरदारी (अल्लाह की रज़ा [54] के आगे) को और ज़्यादा बढ़ा दिया।"

[53] इलाही वादे की सच्चाई का ज़ुहूर

हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ ने पहले ही मोमिनीन को ख़बर दे दी थी कि नौ या दस रातों के अंदर दुश्मन का लश्कर हमलावर होगा। चुनांचे जब मोमिनीन ने उन लश्करों को आते देखा, तो उनके ईमान को और ज़्यादा तक़वियत मिली क्योंकि उन्होंने अपनी आँखों से हुज़ूर ﷺ के फ़रमान की सच्चाई को पूरा होते देखा।

[54] आज़माइश रहमत और तक़वियत-ए-ईमान का ज़रिया है

यह आयत-ए-मुबारका दर्शाती है कि मोमिन के लिए आज़माइश और तकलीफ़ अल्लाह तआला की रहमत का मज़हर है। जब मोमिन आज़माइशों पर सब्र करता है, तो वह साबिरीन के आला दरजे पर फ़ाइज़ होता है और अल्लाह और उसके प्यारे रसूल ﷺ पर उसका ईमान और यक़ीन और गहरा हो जाता है, जिससे अल्लाह की रज़ा के आगे उसकी फ़रमांबरदारी में इज़ाफ़ा होता है।

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