कुरान - 33:25 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
وَرَدَّ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِغَيۡظِهِمۡ لَمۡ يَنَالُواْ خَيۡرٗاۚ وَكَفَى ٱللَّهُ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ٱلۡقِتَالَۚ وَكَانَ ٱللَّهُ قَوِيًّا عَزِيزٗا

Transliteration: (Wa raddal laahul lazeena kafaroo bighaizihim lam yanaaloo khairaa; wa kafal laahul mu'mineenal qitaal; wa kaanal laahu Qawiyyan 'Azeezaa)

और अल्लाह ने काफ़िरों को उनके ग़ुस्से से भरे दिलों के साथ नाकाम लौटा दिया, वे कोई भलाई न पा सके [61]; और अल्लाह मोमिनों के लिए लड़ाई में काफ़ी हो गया [62]; और अल्लाह बड़ी क़ुव्वत वाला, ज़बरदस्त (ग़ालिब) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 25

"और अल्लाह ने काफ़िरों को उनके ग़ुस्से से भरे दिलों के साथ नाकाम लौटा दिया, वे कोई भलाई न पा सके [61]; और अल्लाह मोमिनों के लिए लड़ाई में काफ़ी हो गया [62]; और अल्लाह बड़ी क़ुव्वत वाला, ज़बरदस्त (ग़ालिब) है।"

[61] काफ़िरों की ज़िल्लत-आमेज़ शिकस्त

काफ़िर जो जंगे ख़ंदक़ में फ़तह और माले ग़नीमत की उम्मीद लेकर आए थे, रुसवा होकर वापस धकेल दिए गए। उनके तमाम मंसूबे पूरी तरह नाकाम हो गए, और वे अपनी कोशिशों से कोई भी फ़ायदा हासिल किए बग़ैर शर्मिंदगी और बदहवासी के आलम में मैदान छोड़कर भाग गए।

[62] मोमिनों के लिए अल्लाह की किफ़ायत

अल्लाह तआला ने मोमिनों को मुकम्मल जंग में मुब्तला किए बग़ैर ही उनकी किफ़ायत फ़रमाई। शदीद तूफ़ानी आंधी और फ़रिश्तों की नुसरत से दुश्मन के पाँव उखड़ गए। इससे यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की ताक़त सबसे आला व बरतर है: वह अपने बंदों की हिफ़ाज़त किसी भी ज़रिया से फ़रमा सकता है, ख़्वाह मकड़ी के जाले जैसी नाज़ुक चीज़ से हो या फ़िरऔन को ग़र्क़ करने और परिंदों के ज़रिये लश्करों को तबाह करने जैसे मोजिज़ात से हो। अल्लाह की क़ुव्वत और इज़्ज़त ही मोमिनीन को दुश्मनों पर ग़लबा अता फ़रमाती है।

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