कुरान - 33:27 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَأَوۡرَثَكُمۡ أَرۡضَهُمۡ وَدِيَٰرَهُمۡ وَأَمۡوَٰلَهُمۡ وَأَرۡضٗا لَّمۡ تَطَـُٔوهَاۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٗا

Transliteration: (Wa awrasakum ardahum wa diyaarahum wa amwaalahum wa ardal lam tata'oohaa; wa kaanal laahu 'alaa kulli shai'in Qadeeraa (section 3))

और उसने तुम्हें उनकी ज़मीन, उनके घरों [66], उनके मालों और उस ज़मीन का वारिस बना दिया जिस पर तुमने अभी क़दम भी न रखा था [67]; और अल्लाह हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 27

"और उसने तुम्हें उनकी ज़मीन, उनके घरों [66], उनके मालों और उस ज़मीन का वारिस बना दिया जिस पर तुमने अभी क़दम भी न रखा था [67]। और अल्लाह हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखने वाला है।"

[66] छोड़ी हुई जायदाद और ज़मीनों की मिल्कियत

यह दर्शाता है कि शिकस्त-ख़ुर्दा काफ़िरों की छोड़ी हुई ज़मीनें, मकानात और अमवाल इस्लामी हुकूमत की शरई मिल्कियत बन गए। मुसलमानों को इस्लामी क़ियादत की इजाज़त और निगरानी में इन वसाइल से इस्तिफ़ादा करने का पूरा हक़ हासिल हुआ।

[67] आइंदा की फ़ुतूहात और इस्लामी सल्तनत की तौसीअ

इरशाद फ़रमाया: "उस ज़मीन का वारिस बना दिया जिस पर तुमने अभी क़दम भी न रखा था"—यह बनू क़ुरैज़ा के बाद मोमिनीन को मज़ीद इलाक़ों की फ़तह का इलाही वादा है। इसके कई मफ़ाहिम हो सकते हैं:

  • ख़ैबर की सरज़मीन, जो बनू क़ुरैज़ा के वाक़िए के कुछ ही अर्से बाद मुसलमानों के ज़ेरे नगीं आई।

  • सहाबा-ए-किराम के मुबारक दौर में होने वाली वसीअ इस्लामी फ़ुतूहात (रोम व फ़ारस वगैरह)।

  • क़यामत तक मुसलसल फैलने वाली इस्लामी हुकूमत और उसकी सरहदों की तौसीअ।

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