Transliteration: (Wa awrasakum ardahum wa diyaarahum wa amwaalahum wa ardal lam tata'oohaa; wa kaanal laahu 'alaa kulli shai'in Qadeeraa (section 3))
"और उसने तुम्हें उनकी ज़मीन, उनके घरों [66], उनके मालों और उस ज़मीन का वारिस बना दिया जिस पर तुमने अभी क़दम भी न रखा था [67]। और अल्लाह हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखने वाला है।"
यह दर्शाता है कि शिकस्त-ख़ुर्दा काफ़िरों की छोड़ी हुई ज़मीनें, मकानात और अमवाल इस्लामी हुकूमत की शरई मिल्कियत बन गए। मुसलमानों को इस्लामी क़ियादत की इजाज़त और निगरानी में इन वसाइल से इस्तिफ़ादा करने का पूरा हक़ हासिल हुआ।
इरशाद फ़रमाया: "उस ज़मीन का वारिस बना दिया जिस पर तुमने अभी क़दम भी न रखा था"—यह बनू क़ुरैज़ा के बाद मोमिनीन को मज़ीद इलाक़ों की फ़तह का इलाही वादा है। इसके कई मफ़ाहिम हो सकते हैं:
ख़ैबर की सरज़मीन, जो बनू क़ुरैज़ा के वाक़िए के कुछ ही अर्से बाद मुसलमानों के ज़ेरे नगीं आई।
सहाबा-ए-किराम के मुबारक दौर में होने वाली वसीअ इस्लामी फ़ुतूहात (रोम व फ़ारस वगैरह)।
क़यामत तक मुसलसल फैलने वाली इस्लामी हुकूमत और उसकी सरहदों की तौसीअ।
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