कुरान - 33:29 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
وَإِن كُنتُنَّ تُرِدۡنَ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَٱلدَّارَ ٱلۡأٓخِرَةَ فَإِنَّ ٱللَّهَ أَعَدَّ لِلۡمُحۡسِنَٰتِ مِنكُنَّ أَجۡرًا عَظِيمٗا

Transliteration: (Wa in kuntunna turidnal laaha wa Rasoolahoo wad Daaral Aakhirata fa innal laaha a'adda lil muhsinaati min kunna ajjran 'azeemaa)

और अगर तुम अल्लाह, उसके रसूल और आख़िरत के घर की तलबगार हो [72], तो बेशक अल्लाह ने तुममें से नेकोकार बीवियों के लिए बहुत बड़ा अज्र तैयार कर रखा है [73] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 29

"और अगर तुम अल्लाह, उसके रसूल और आख़िरत के घर की तलबगार हो [72], तो बेशक अल्लाह ने तुममें से नेकोकार बीवियों के लिए बहुत बड़ा अज्र तैयार कर रखा है [73]।"

[72] रज़ा-ए-इलाही और आख़िरत की तलब

यह आयत हुज़ूर ﷺ की मुक़द्दस बीवियों से ख़िताब फ़रमाती है और याद दिलाती है कि अगर उनकी हक़ीक़ी आरज़ू अल्लाह और उसके रसूल की क़ुर्बत और आख़िरत का दायमी घर है, तो उन्हें इस रूहानी अज़मत के साथ आने वाली आज़माइशों और सादगी को ख़ुशी से बर्दाश्त करना चाहिए।

[73] नेकोकारों के लिए अज़ीम अज्र

अल्लाह तआला ने उनमें से जो नेक, साबिरा और साबित-क़दम हैं उनके लिए अज़ीम अज्र व सवाब तैयार कर रखा है। यह बदला सिर्फ़ इस दुनियावी ज़िंदगी तक महदूद नहीं बल्कि ख़ास तौर पर आख़िरत में है, जो मुख़लिस और फ़रमांबरदार मोमिनों के लिए दायमी नेमतों की बशारत है।

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