कुरान - 33:30 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
يَٰنِسَآءَ ٱلنَّبِيِّ مَن يَأۡتِ مِنكُنَّ بِفَٰحِشَةٖ مُّبَيِّنَةٖ يُضَٰعَفۡ لَهَا ٱلۡعَذَابُ ضِعۡفَيۡنِۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٗا

Transliteration: (Yaa nisaaa'an Nabiyyi mai yaati minkunna bifaa hishatim mubaiyinatiny yudaa'af lahal 'azaabu di'fain wa kaana zaalika 'alal laahi yaseera (End Juz 21))

ऐ नबी की बीवियो! तुममें से जो कोई खुली बेहयाई [74] (नाफ़रमानी) का इर्तिकाब करे उसे दोहरा अज़ाब दिया जाएगा [75]; और यह अल्लाह के लिए बहुत आसान है [76] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 30

"ऐ नबी की बीवियो! तुममें से जो कोई खुली बेहयाई [74] (नाफ़रमानी) का इर्तिकाब करे उसे दोहरा अज़ाब दिया जाएगा [75]; और यह अल्लाह के लिए बहुत आसान [76] है।"

[74] खुली बेहयाई और नाफ़रमानी का मफ़हूम

यहाँ "खुली बेहयाई" से मुराद ख़ास तौर पर शौहर की नाफ़रमानी है, बिलख़ुसूस कबीरा गुनाह। इसे आम छोटे गुनाहों से अलग रखा गया है, जिन्हें बेहयाई की मामूली सूरत समझा जाता है।

[75] अज़वाज-ए-मुतह्हरात के लिए अज़ाब की दोहरी शिद्दत

हुज़ूर ﷺ की अज़वाज-ए-मुतह्हरात तमाम औरतों से बुलंद तरीन मुक़ाम रखती हैं, लिहाज़ा उनकी शान के ख़िलाफ़ किसी ख़ता पर सज़ा भी दीगर औरतों के मुक़ाबले दोहरी होगी। इसकी वजह यह है कि अल्लाह ने उन्हें जो नेमतें और अज़मत अता फ़रमाई वह दूसरों से कहीं बढ़कर है, लिहाज़ा उनकी जवाबदेही भी उतनी ही अज़ीम है। यह बात उन ग़लत तावीलात का भी क़तई रद्द करती है जो गुमराह फ़िरक़े (जैसे राफ़ज़ी) इस आयत से अपने बातिल अक़ायद गढ़ने के लिए करते हैं।

[76] इलाही अद्ल और क़ुदरत

अल्लाह तआला इस दोहरी सज़ा को आसानी से नाफ़िज़ फ़रमाने पर पूरी क़ुदरत रखता है। आला मर्तबे वालों के लिए सज़ा की यह शिद्दत दर-अस्ल अल्लाह के अद्ल और हिकमत का मज़हर है, जो उन्हें—और तमाम मोमिनीन को—गुनाह से बचने की शदीद तरग़ीब देती है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now