कुरान - 33:26 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
وَأَنزَلَ ٱلَّذِينَ ظَٰهَرُوهُم مِّنۡ أَهۡلِ ٱلۡكِتَٰبِ مِن صَيَاصِيهِمۡ وَقَذَفَ فِي قُلُوبِهِمُ ٱلرُّعۡبَ فَرِيقٗا تَقۡتُلُونَ وَتَأۡسِرُونَ فَرِيقٗا

Transliteration: (Wa anzalal lazeena zaaha roohum min Ahlil Kitaabi min sa yaaseehim wa qazafa fee quloobihimm mur ru'ba fareeqan taqtuloona wa taasiroona fareeqaaa)

और अहले किताब (यहूद) में से जिन्होंने उनकी मदद की थी [63], अल्लाह ने उन्हें उनके क़िलों से नीचे उतार दिया और उनके दिलों में रोब डाल दिया [64]; तुम उनके एक गिरोह को क़त्ल कर रहे थे और एक गिरोह को क़ैदी बना रहे थे [65]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 26

"और अहले किताब (यहूद) में से जिन्होंने उनकी मदद की थी [63], अल्लाह ने उन्हें उनके क़िलों से नीचे उतार दिया और उनके दिलों में रोब डाल दिया [64]; तुम उनके एक गिरोह को क़त्ल कर रहे थे और एक गिरोह को क़ैदी बना रहे थे [65]।"

[63] बनू क़ुरैज़ा का मुहासिरा

यह आयत-ए-करीमा 5 हिजरी में जंगे ख़ंदक़ के फ़ौरन बाद पेश आने वाले ग़ज़्वा-ए-बनू क़ुरैज़ा की तरफ़ इशारा करती है। मदीना के यहूदी क़बीले बनू क़ुरैज़ा ने मुआहदे की ख़िलाफ़-वर्ज़ी करके जंगे ख़ंदक़ के नाज़ुक तरीन वक़्त में दुश्मनों की मदद की थी। जंगे ख़ंदक़ में फ़तह के बाद हुज़ूर ﷺ को हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) के ज़रिये बनू क़ुरैज़ा पर चढ़ाई का इलाही हुक्म मिला। अहले ईमान ने कूच किया और 25 दिन तक उनके क़िलों का मुहासिरा जारी रखा, जिसके बाद उन्होंने हथियार डाल दिए।

फ़ैसला और उसके असरात

हज़रत साद बिन मुआज़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) के तजवीज़-कर्दा फ़ैसले के मुताबिक़ यहूदियों के बालिग़ जंगजू मर्दों को क़त्ल किया गया जिनकी तादाद लगभग छह सौ थी, जबकि औरतों और बच्चों को क़ैदी बनाया गया जिनकी तादाद तक़रीबन सात सौ थी। माले ग़नीमत में हथियार, ज़िरहें, मवेशी और दौलत मुसलमानों के हाथ आई। इन्हीं क़ैदियों में हज़रत रैहाना बिन्ते शमऊन भी थीं जिन्हें बाद में आज़ाद फ़रमा कर हुज़ूर ﷺ ने अपने निकाह में लिया।

[64] दिलों में रोब व दहशत का छा जाना

यह आयत उजागर करती है कि अल्लाह तआला ने दुश्मनों के दिलों में मुसलमानों का रोब व ख़ौफ़ डाल दिया, जो मुसलमानों के ईमान और रूहानी जलाल के पेशेनज़र एक कुदरती अमर था। यहाँ तक कि जानवर भी अहले ईमान के रोब को महसूस करते थे, जैसा कि शेर का एक बुज़ुर्ग सहाबी के सामने निहायत आजिज़ी से पेश आना रिवायतों में मौजूद है।

[65] क़ैदियों का अंजाम

सरकश और बग़ावत पर आमादा नौजवान जंगजुओं को उनकी खुली ग़द्दारी की वजह से क़त्ल किया गया, जबकि औरतों और बच्चों को उस ज़माने के जंगी दस्तूर के मुताबिक़ क़ैदी बनाया गया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now