कुरान - 33:43 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
هُوَ ٱلَّذِي يُصَلِّي عَلَيۡكُمۡ وَمَلَـٰٓئِكَتُهُۥ لِيُخۡرِجَكُم مِّنَ ٱلظُّلُمَٰتِ إِلَى ٱلنُّورِۚ وَكَانَ بِٱلۡمُؤۡمِنِينَ رَحِيمٗا

Transliteration: (Huwal lazee yusallee 'alaikum wa malaaa'ikatuhoo liyukhrijakum minazzulumaati ilan-noor wa kaana bilmu'mineena Raheemaa)

वही है जो तुम पर रहमत भेजता है और उसके फ़रिश्ते भी (तुम्हारे लिए मग़फ़िरत की दुआ करते हैं), ताकि वह तुम्हें अंधेरों से निकाल कर रौशनी की तरफ़ ले आए [116]; और वह मोमिनों पर निहायत रहम फ़रमाने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 43

"वही है जो तुम पर रहमत भेजता है, और उसके फ़रिश्ते भी, ताकि वह तुम्हें अंधेरों से निकाल कर रौशनी की तरफ़ ले आए [116]। और वह मोमिनों पर निहायत रहम फ़रमाने वाला है।"

[116] शाने नुज़ूल

जब यह मुबारक आयत नाज़िल हुई, तो हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने आजिज़ी से अर्ज़ किया: “क्या अल्लाह तआला ने वाकई हम पर इतना अज़ीम एहसान फ़रमाया है? क्या वह आपके वसीले से हम गुलामों पर भी रहमतें नाज़िल फ़रमाता है, ऐ अल्लाह के रसूल?” इसके जवाब में यह आयत नाज़िल हुई, जिसने तस्दीक़ फ़रमाई कि बेशक अल्लाह और उसके फ़रिश्ते मोमिनीन पर सलात (रहमत व दुआ) भेजते हैं, ख़ास तौर पर हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ के मुबारक तअल्लुक़ की बदौलत। (ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)

यह आयत इस बात का भी खुला सुबूत है कि जो लोग सहाबा-ए-किराम की तन्क़ीस (बुराई) करते हैं या उन्हें गुमराह समझते हैं, वे इस क़ुरानी आयत की सच्चाई का इंकार करते हैं, क्योंकि ख़ुद अल्लाह तआला ने मोमिनीन और बिलख़ुसूस सहाबा-ए-किराम के लिए रहमत और इज़्ज़त का ऐलान फ़रमाया है, जिन्हें उसने कुफ़्र व जिहालत की तारीकियों से निकाल कर ईमान व हिदायत के नूर की तरफ़ रहनुमाई फ़रमाई।

यूँ यह आयत सहाबा-ए-किराम के आला तरीन मुक़ाम, इलाही रहमत की अज़मत, और हुज़ूर ﷺ के वसीले से हासिल होने वाले रूहानी इंक़िलाब को साबित करती है।

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