कुरान - 33:44 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
تَحِيَّتُهُمۡ يَوۡمَ يَلۡقَوۡنَهُۥ سَلَٰمٞۚ وَأَعَدَّ لَهُمۡ أَجۡرٗا كَرِيمٗا

Transliteration: (Tahiyyatuhum Yawma yalqawnahoo salaamunw wa a'adda lahum ajran kareemaa)

जिस दिन वे उससे मिलेंगे उनका सलाम 'सलाम' होगा [117], और उसने उनके लिए बा-इज़्ज़त अज्र तैयार कर रखा है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 44

"जिस दिन वे उससे मिलेंगे उनका सलाम 'सलाम' होगा [117], और उसने उनके लिए बा-इज़्ज़त अज्र तैयार कर रखा है।"

[117] बारगाह-ए-इलाही से सलामती का तोहफ़ा

इसका मफ़हूम यह है कि नेक मोमिनीन का इस्तक़बाल "सलाम" के साथ दर्जज़ैल मुबारक़ औक़ात में किया जाएगा:

  • मौत के वक़्त, मलकुल मौत (हज़रत इज़्राईल) की तरफ़ से, जो दुनिया से रुख़सती में इज़्ज़त और आसानी की अलामत है।

  • क़यामत के दिन क़ब्रों से उठते वक़्त, जब फ़रिश्ते उनका इस्तक़बाल करेंगे और उन्हें अमन व सलामती की बशारत देंगे।

  • जन्नत के दरवाज़े पर, जब जन्नत के दारोग़ा हज़रत रिज़वान सलाम के साथ उनका ख़ैर-मक़दम करेंगे।

  • या सबसे अफ़ज़ल व आला, मुलाक़ात के दिन ख़ुद अल्लाह तआला की ज़ात-ए-अक़दस उन्हें सलाम फ़रमाएगी, जो दायमी सलामती, रज़ा और अज़ीम शरफ़ का मज़हर है।

ये मुबारक़ हस्तियां हमेशा की सलामती में रहेंगी जहाँ कोई ख़ौफ़, ग़म या तकलीफ़ न होगी, और अल्लाह ने आख़िरत में उनके लिए निहायत इज़्ज़तदार अज्र (जन्नत) तैयार कर रखा है।

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