Transliteration: (Tahiyyatuhum Yawma yalqawnahoo salaamunw wa a'adda lahum ajran kareemaa)
"जिस दिन वे उससे मिलेंगे उनका सलाम 'सलाम' होगा [117], और उसने उनके लिए बा-इज़्ज़त अज्र तैयार कर रखा है।"
इसका मफ़हूम यह है कि नेक मोमिनीन का इस्तक़बाल "सलाम" के साथ दर्जज़ैल मुबारक़ औक़ात में किया जाएगा:
मौत के वक़्त, मलकुल मौत (हज़रत इज़्राईल) की तरफ़ से, जो दुनिया से रुख़सती में इज़्ज़त और आसानी की अलामत है।
क़यामत के दिन क़ब्रों से उठते वक़्त, जब फ़रिश्ते उनका इस्तक़बाल करेंगे और उन्हें अमन व सलामती की बशारत देंगे।
जन्नत के दरवाज़े पर, जब जन्नत के दारोग़ा हज़रत रिज़वान सलाम के साथ उनका ख़ैर-मक़दम करेंगे।
या सबसे अफ़ज़ल व आला, मुलाक़ात के दिन ख़ुद अल्लाह तआला की ज़ात-ए-अक़दस उन्हें सलाम फ़रमाएगी, जो दायमी सलामती, रज़ा और अज़ीम शरफ़ का मज़हर है।
ये मुबारक़ हस्तियां हमेशा की सलामती में रहेंगी जहाँ कोई ख़ौफ़, ग़म या तकलीफ़ न होगी, और अल्लाह ने आख़िरत में उनके लिए निहायत इज़्ज़तदार अज्र (जन्नत) तैयार कर रखा है।
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