कुरान - 33:46 सूरह अल-अहज़ाब अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
وَدَاعِيًا إِلَى ٱللَّهِ بِإِذۡنِهِۦ وَسِرَاجٗا مُّنِيرٗا

Transliteration: (Wa daa'iyan ilal laahi bi iznihee wa siraajam muneeraa)

और अल्लाह के हुक्म से उसकी तरफ़ दावत देने वाला [120] और एक रौशन करने वाला सूरज [121] बनाकर। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहज़ाब आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहज़ाब तफ़सीर - आयत 46

"और अल्लाह के हुक्म से उसकी तरफ़ दावत देने वाला [120] और एक रौशन करने वाला सूरज [121] बनाकर।"

[120] अल्लाह की तरफ़ आलमगीर दावत देने वाले

यह आयत-ए-मुबारका हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ को अल्लाह की तरफ़ बुलाने वाला (दाई) क़रार देती है, अपनी मर्जी से नहीं बल्कि अल्लाह के हुक्म से। इससे दो बुनियादी बातें वाज़ेह होती हैं:

  1. हुज़ूर ﷺ की दावत सिर्फ़ आपके अहकाम या तालीमात की तरफ़ ही नहीं, बल्कि आपकी मुक़द्दस ज़ात की तरफ़ भी है—आपकी हयात, आपके आमाल और आपका पाकीज़ा किरदार ख़ुद अल्लाह तक पहुँचने का मुकम्मल ज़रिया और रास्ता है।

  2. आपकी दावत आलमगीर (सार्वभौमिक) है। चूंकि यहाँ किसी मख़सूस क़ौम या ख़ास गिरोह का ज़िक्र नहीं फ़रमाया गया, इसका मतलब यह है कि आप पूरी कायनात के नबी बनाकर भेजे गए हैं—ज़मान व मकान की हर क़ैद से आज़ाद, हर दौर और हर मख़लूक़ के लिए।

[121] रौशन और नूर बख़्शने वाला आफ़ताब

हुज़ूर नबी-ए-अकरम ﷺ को चमकता हुआ आफ़ताब (सिराजे मुनीर) फ़रमाया गया—सिर्फ़ तमसील के तौर पर नहीं, बल्कि हक़ीक़ी और रूहानी तौर पर:

  • आसमान का सूरज सिर्फ़ ज़ाहिरी (भौतिक) रौशनी देता है, मगर वह किसी के दिल या क़ब्र को रौशन नहीं कर सकता।

  • लेकिन मदीने का हक़ीक़ी आफ़ताब, यानी हुज़ूर नबी-ए-पाक ﷺ, वह रूहानी नूर अता फ़रमाते हैं जो दिलों को चमकाता है, क़ब्र को जगमगाता है और रूहों को हिदायत बख़्शता है।

आपकी हिदायत हमेशा रहने वाले नूर का चश्मा है, जो ज़िंदगी के हर पहलू और हर दौर में रौशनी और रहमत बख़्शती है।

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