Transliteration: (Wa bashshiril mu'mineena bi annna lahum minal laahi fadlan kabeera)
"और मोमिनों को ख़ुशख़बरी दे दीजिए कि उनके लिए अल्लाह की तरफ़ से बहुत बड़ा फ़ज़्ल [122] है।"
इस आयत-ए-करीमा में ख़ास तौर पर हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ के मोमिन उम्मतियों के लिए अल्लाह तआला के एक अज़ीम फ़ज़्ल व एहसान की ख़ुशख़बरी सुनाई गई है।
पिछली तमाम उम्मतों के मुक़ाबले में आख़िरी नबी ﷺ के गुलामों का मर्तबा सबसे बुलंद है, क्योंकि उन्हें आपकी ग़ुलामी का शर्फ़ हासिल हुआ है।
हालाँकि उनके दीनी आमाल पिछली उम्मतों के मुक़ाबले में हल्के और आसान हैं, मगर उन पर मिलने वाला सवाब और अजर बेहद अज़ीम है। यह आसानी और बेशुमार सवाब का इज़्ज़तदार मर्तबा उम्मत-ए-मुहम्मदिया पर अल्लाह की ख़ास रहमत का इज़हार है—ऐसा फ़ज़्ल जो पिछली किसी उम्मत को हासिल नहीं हुआ।
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