Transliteration: (Innal laaha la'anal kaafireena wa a'adda lahum sa'eeraa)
"बेशक अल्लाह ने काफ़िरों पर लानत फ़रमाई है और उनके लिए भड़कती हुई आग [187] तैयार कर रखी है।"
यह आयत-ए-मुबारका काफ़िरों के क़तई अंजाम को बयान फ़रमाती है—वे अल्लाह की रहमत से महरूम (लानती) हैं और उनके लिए दहकती हुई जहन्नम की आग तैयार रखी गई है।
वे क़यामत की तैयारी करने के बजाय अपनी ज़िंदगी को खेल-कूद और मज़ाक़ में बर्बाद करते हैं और इस्लाम की सच्ची तालीमात का मज़ाक़ उड़ाते हैं।
यह रवैया लानती गिरोह की अलामत है, और उनका अंजाम अज़ाब-ए-इलाही के साथ तय हो चुका है। यह आयत हक़ बात के ख़िलाफ़ ग़फ़लत और इस्तेहज़ा बरतने वालों के लिए एक सख़्त तंबीह है।
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