Transliteration: (Khaalideena feehaaa abadaa, laa yajidoona waliyyanw wa laa naseeraa)
"वे हमेशा-हमेश उसमें रहेंगे; न वे वहाँ कोई हिमायती पाएंगे और न कोई मददगार [188]।"
यह आयत ज़ोर देती है कि काफ़िर और मुनाफ़िक़ हमेशा के लिए जहन्नम में रहेंगे, जहाँ से न कोई नजात का रास्ता होगा, न कोई हामी और न कोई मददगार।
वे मुकम्मल तौर पर बे-यारो मददगार छोड़ दिए जाएंगे—न कोई उनकी मदद को आ सकेगा और न उन्हें कोई सिफ़ारिश या रिहाई मयस्सर होगी।
इसके बरअक्स अल्लाह तआला मोमिनों को इन दोनों हौलनाकियों से महफ़ूज़ रखेगा: हमेशा के अज़ाब से भी और क़यामत के दिन मददगार के फ़क़्दान से भी (क्योंकि उन्हें शफ़ाअत हासिल होगी)।
यह आयत हक़ को झुठलाने वालों के लिए इलाही अद्ल की सख़्ती को वाज़ेह करती है, और साथ ही सच्चे ईमान वालों के लिए मख़सूस रहमत की बशारत देती है।
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