कुरान - 6:109 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

109
وَأَقۡسَمُواْ بِٱللَّهِ جَهۡدَ أَيۡمَٰنِهِمۡ لَئِن جَآءَتۡهُمۡ ءَايَةٞ لَّيُؤۡمِنُنَّ بِهَاۚ قُلۡ إِنَّمَا ٱلۡأٓيَٰتُ عِندَ ٱللَّهِۖ وَمَا يُشۡعِرُكُمۡ أَنَّهَآ إِذَا جَآءَتۡ لَا يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Wa aqsamoo billaahi jahda aimaanihim la'in jaaa'at hum Aayatul la yu'minunna bihaa; qul innamal Aayaatu 'indal laahi wa maa yush'irukum annahaaa izaa jaaa'at laa yu'minoon)

और वे अल्लाह की कड़ी से कड़ी क़समें खाते हैं [235] कि अगर उनके पास कोई निशानी आ जाए तो वह उस पर ज़रूर ईमान ले आएंगे। कह दीजिए कि निशानियाँ तो अल्लाह ही के पास हैं [236], और तुम्हें क्या मालूम कि जब निशानियाँ आ भी जाएं तो वह ईमान न लाएं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 109 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 109 की तफ़्सीर

✅ [235] काफ़िरों की आदत के तौर पर क़समें खाना

यह आयत बताती है कि बार-बार क़समें खाना काफ़िरों की मशहूर आदत है। उनकी सख़्त से सख़्त क़सम भी अक्सर खोखली और धोखे पर होती है। यहां तक कि शैतान ने भी हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) के सामने झूठी क़सम खाई — “और उसने दोनों से क़सम खाई कि मैं तुम दोनों का भलाई चाहने वाला हूँ” (सूरा अल-आ'राफ़ 7:21)। ऐसी क़समें अक्सर मक़्सदपरस्ती और फ़रेब का ज़रिया होती हैं, न कि सच्चे ईमान की निशानी।

✅ [236] आयत के नाज़िल होने का पृष्ठभूमि

मक्के के काफ़िरों ने नबी ﷺ से ऐसे मोज़िज़ात मांगे जैसे हज़रत मूसा, हज़रत ईसा और हज़रत सालेह (अलैहिमुस्सलाम) को मिले थे। उन्होंने मांगा कि:

  • सफ़ा पहाड़ सोने का हो जाए
  • मुर्दे उठकर उनकी नबूवत की गवाही दें
  • फ़रिश्ते सामने आ जाएं

नबी ﷺ ने उनसे पूछा कि क्या वह सचमुच ईमान लाएंगे अगर यह निशानियाँ आ गईं? उन्होंने क़सम खाकर कहा: हां। नबी ﷺ ने इन मोज़िज़ात के लिए दुआ करने का इरादा किया, लेकिन हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) आए और बोले: “ऐ अल्लाह के हबीब! आप जो भी दुआ करेंगे, वह क़बूल होगी। लेकिन अगर यह निशानियाँ देखने के बाद भी उन्होंने कुफ़्र किया, तो वह फ़ौरन हलाक कर दिए जाएंगे। अगर ज़िंदा रहे तो मुमकिन है कि उनमें से कुछ बाद में ईमान ले आएं।” यह सुनकर नबी ﷺ ने दुआ करने से रुक गए। इसके बाद यह आयत नाज़िल हुई (तफ़सीर ख़ज़िन, तफ़सीर रूहुल बयान)।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now