Transliteration: (Wa laa tasubbul lazeena yad'oona min doonil laahi fa yasubbul laaha 'adwam bighairi 'ilm; kazaalika zaiyannaa likulli ummatin 'amalahum summa ilaa Rabbihim marji'uhum fa yunabbi'uhum bimaa kaanoo ya'maloon)
मुसलमान काफ़िरों के बुतों के बारे में बुरा कहते थे, तो मशरिक़ीन ने बदले में अल्लाह की बेअदबी शुरू कर दी। तब यह आयत नाज़िल हुई, जिसमें मुसलमानों को हुक्म दिया गया कि बुत-परस्तों के सामने उनके माबूदों को बुरा न कहें। इब्न अन्हबरी के मुताबिक, बाद में जब मुसलमान काफ़ी मज़बूत हो गए और अल्लाह की बेअदबी पर सख़्ती से जवाब देने की ताक़त आ गई, तो यह हुक्म जिहाद की आयतों से मंसूख़ हो गया (जैसा कि ख़ज़िन और ख़ज़ाइनुल इर्फ़ान में है)।
फिर भी, क़ुरआन में कई जगह शैतान, बुतों और कुरैश के सरदारों की सख़्त तज़लील की गई है, जैसे — “बेशक तुम और वह जिसे तुम पूजते हो” (सूरा साफ़्फ़ात 37:161) और “बदतमीज़ और उसके पैदा होने में भी ऐब है” (सूरा क़लम 68:13)।
इस आयत से कुछ अहम मसाइल समझ में आते हैं:
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