कुरान - 6:110 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

110
وَنُقَلِّبُ أَفۡـِٔدَتَهُمۡ وَأَبۡصَٰرَهُمۡ كَمَا لَمۡ يُؤۡمِنُواْ بِهِۦٓ أَوَّلَ مَرَّةٖ وَنَذَرُهُمۡ فِي طُغۡيَٰنِهِمۡ يَعۡمَهُونَ

Transliteration: (Wa nuqallibu af'idatahum wa absaarahum kamaa lam yu'minoo biheee awwala marratinw wa nazaruhum fee tughyaanihim ya'mahoon (section 13, End Juz 7))

और हम उनके दिलों और उनकी आँखों को फेर देंगे [237], क्योंकि उन्होंने पहली बार ही इस पर ईमान नहीं लाया। और हम उन्हें उनकी सरकशी में, अंधे-भटके हुए छोड़ देंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 110 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 110

✅ [237]

इसका मतलब है कि चाँद के दो टुकड़े होना और सूरज का वापस लौटना जैसे चमत्कार देखने के बाद भी उन्होंने ईमान नहीं लाया। चूँकि उन्होंने पहली बार ही इन खुले निशानों को ठुकरा दिया, इसलिए बाद में उनके सच्चे ईमान लाने की उम्मीद बेकार है। उनका हर दावा और वादा झूठा और बनावटी है।

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