Transliteration: (Wa law annanaa nazzal naaa ilaihimul malaaa'ikata wa kallamahumul mawtaa wa hasharnaa 'alaihim kulla shai'in qubulam maa kaanoo liyu'minooo illaaa ai yashaaa'al laahu wa laakinna aksarahum yajhaloon)
काफ़िरों की माँग थी कि वे फ़रिश्तों को उनके असली रूप में देखें, हालाँकि सहाबा-ए-किराम ने कई बार फ़रिश्तों को इंसानी रूप में देखा था।
मुक़ाबले में उन्होंने मज़ाक़ उड़ाते हुए नबी ﷺ से कहा कि हमारे मुर्दों को ज़िंदा कर दो ताकि वे आपकी नबूवत की गवाही दें, या ऐसे फ़रिश्ते भेजो जो आपकी सच्चाई की तस्दीक़ करें। इस आयत में जवाब दिया गया कि अगर ऐसे चमत्कार भी हो जाएँ, तो भी वे ईमान नहीं लाएँगे, बल्कि इन्हें जादू या धोखा कह देंगे। हक़ीक़त यह है कि पत्थर और लकड़ी तक ने नबी ﷺ की सच्चाई की गवाही दी, फिर भी ये लोग कुफ़्र पर ही जमे रहे।
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