Transliteration: (Afaghairal laahi abtaghee hakamanw wa Huwal lazee anzala ilaikumul Kitaaba mufassalaa; wallazeena atai naahumul Kitaaba ya'lamoona annahoo munazzalum mir Rabbika bilhaqqi falaa takoonanna minal mumtareen)
मक्का के काफ़िरों ने सुझाव दिया कि ईसाई और यहूदी पंडितों को हाकिम बनाया जाए ताकि वे हक़ और गुमराही का फ़ैसला करें। उनका मक़सद था कि इनको रिश्वत देकर अपने पक्ष में फैसला करवाएँ। इस आयत में उस सुझाव को रद्द किया गया और यह बयान किया गया कि क़ुरआन हर चीज़ की तफ़सील बताने वाली किताब है।
यह उन लोगों की तरफ इशारा करता है जिन्हें आसमान से उतारी गई किताबों का सही इल्म दिया गया था, जैसे हज़रत अब्दुल्लाह इब्न सलाम। या फिर उन अहल-ए-किताब के बड़े आलिमों की तरफ जो दिल से नबी ﷺ को सच्चा मानते थे लेकिन दुनियावी मक़सद से खुलकर इकरार नहीं करते थे।
जिन पंडितों और पोपों को काफ़िर हाकिम बनाना चाहते थे, वे दिल से नबी ﷺ को सच्चा मानते हैं, चाहे ज़ाहिर में इनकार करते हों या आगे करेंगे।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat