कुरान - 6:116 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

116
وَإِن تُطِعۡ أَكۡثَرَ مَن فِي ٱلۡأَرۡضِ يُضِلُّوكَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَإِنۡ هُمۡ إِلَّا يَخۡرُصُونَ

Transliteration: (Wa in tuti' aksara man fil ardi yudillooka 'an sabeelil laah; iny yattabi'oona illaz zanna wa in hum illaa yakhrusoon)

और तुम्हारे रब का क़ौल सच्चाई और इन्साफ़ [251] में पूरा है। उसकी बातों को कोई बदल नहीं सकता [252]। और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 116 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 115 की तफ़्सीर

✅ [251] तुम्हारे रब के क़ौल का मतलब

"तुम्हारे रब का क़ौल" से मुराद या तो वह फ़ैसला है जो अल्लाह तआला ने मुसलमानों और काफ़िरों के बीच किया, या फिर इससे तमाम आसमानी किताबें — जिनमें क़ुरआन भी शामिल है — मुराद हैं। हर हालत में मक़सद ये है कि अल्लाह का क़ौल हक़ और इंसाफ़ में कामिल है।

✅ [252] क़ुरआन की अदलीलत

इसका मतलब ये है कि क़ुरआन मजीद हक़ीक़तन सच्ची किताब है और क़ियामत तक कोई इंसान इसे बदल नहीं सकता। ये आयत नस्क़ (abrogation) के बारे में नहीं है, क्योंकि कोई शख़्स किसी आयत को बदलने का इख़्तियार नहीं रखता; नस्क़ सिर्फ़ अल्लाह के हुक्म से होता है। ये उस डॉक्टर की मिसाल की तरह है जो मरीज़ की हालत देखकर दवा बदल देता है, लेकिन अगर मरीज़ अपनी तरफ़ से दवा बदल दे तो ये नुकसानदेह और नाजायज़ होगा।

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