कुरान - 6:118 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

118
فَكُلُواْ مِمَّا ذُكِرَ ٱسۡمُ ٱللَّهِ عَلَيۡهِ إِن كُنتُم بِـَٔايَٰتِهِۦ مُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Fakuloo mimmmaa zukirasmul laahi 'alaihi in kuntum bi Aayaatihee mu'mineen)

फिर खाओ उस (जानवर) में से जिस पर अल्लाह का नाम लिया गया है [257], यदि तुम उसकी आयतों पर ईमान रखते हो [258]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 118 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 118 की तफ़्सीर

✅ [257] ज़बह़ में अल्लाह का नाम लेना ज़रूरी

इस आयत से स्पष्ट होता है कि केवल वही जानवर हलाल है जिसे अल्लाह का नाम लेकर ज़बह़ किया गया हो। ज़बह़ करते समय "बिस्मिल्लाह, अल्लाहु अकबर" कहना आवश्यक है। ज़बह़ करने वाला मुसलमान या अहले-किताब में से होना चाहिए। अगर कोई मुशरिक या मुरतद ज़बह़ करे, चाहे अल्लाह का नाम भी ले, तो वह मांस हलाल नहीं होगा।

✅ [258] नाज़िल होने का सबब और शरीअत पर ईमान

यह आयत उन मुशरिकों के जवाब में नाज़िल हुई जिन्होंने मुसलमानों पर आपत्ति की कि वे बुतों के नाम पर चढ़ाया गया मांस क्यों नहीं खाते। अल्लाह ने स्पष्ट कर दिया कि केवल वही मांस हलाल है जो उसके नाम पर ज़बह़ किया जाए, और जो किसी और के नाम पर चढ़ाया गया हो, वह हराम है। हलाल को हराम या हराम को हलाल ठहराना अल्लाह की आयतों का इंकार है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now