कुरान - 6:119 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

119
وَمَا لَكُمۡ أَلَّا تَأۡكُلُواْ مِمَّا ذُكِرَ ٱسۡمُ ٱللَّهِ عَلَيۡهِ وَقَدۡ فَصَّلَ لَكُم مَّا حَرَّمَ عَلَيۡكُمۡ إِلَّا مَا ٱضۡطُرِرۡتُمۡ إِلَيۡهِۗ وَإِنَّ كَثِيرٗا لَّيُضِلُّونَ بِأَهۡوَآئِهِم بِغَيۡرِ عِلۡمٍۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعۡلَمُ بِٱلۡمُعۡتَدِينَ

Transliteration: (Wa maa lakum allaa ta'kuloo mimmaa zukirasmul laahi 'alaihi wa qad fassala lakum maa harrama 'alaikum illaa mad turirtum ilaih; wa inna kaseeral la yudilloona bi ahwaaa'ihim bighairi 'ilm; inna Rabbaka Huwa a'lamu bilmu'tadeen)

तुम्हें क्या हो गया है कि तुम उस (मांस) में से नहीं खाते जिस पर अल्लाह का नाम लिया गया है [259]? उसने तुम्हारे लिए विस्तार से बयान कर दिया है [260] कि तुम्हारे लिए क्या हराम है, सिवाय इसके कि तुम मजबूर हो जाओ। और बेशक, बहुत से लोग बिना ज्ञान के अपनी ख़्वाहिशों के साथ दूसरों को गुमराह करते हैं [261]। निस्संदेह, तुम्हारा रब सीमा लांघने वालों को खूब जानता है [262]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 119 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

:

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 119 की तफ़्सीर

✅ [259] अल्लाह के नाम पर ज़बह़ किया गया मांस हलाल

जो जानवर अल्लाह का नाम लेकर ज़बह़ किया गया हो, वह हलाल है, चाहे वह पहले किसी रिवाज जैसे "बहीरा" या "साइबा" में शामिल रहा हो। जो जानवर बुतों के नाम पर छोड़े गए हों, वे हराम हैं, लेकिन अगर उन्हें अल्लाह का नाम लेकर ज़बह़ किया जाए, जैसे ग्यारहवीं शरीफ़ पर, तो वह हलाल और मुबारक है।

✅ [260] केवल हराम चीज़ें स्पष्ट बयान की गईं

इस्लामी शरीअत ने सिर्फ़ हराम चीज़ों को साफ़-साफ़ बयान किया है, और जो चीज़ स्पष्ट रूप से हराम न बताई गई हो, वह हलाल मानी जाती है। अल्लाह का फ़रमान है: "मुझे वह चीज़ नहीं मिलती जो मुझे नाज़िल की गई किताब में हराम हो" [6:145]।

✅ [261] मजबूरी में रुख़्सत

अगर जान बचाने की नौबत हो तो हराम मांस खाना जायज़ है, लेकिन सिर्फ़ उतना ही जितना ज़रूरी हो। यह शरीअत की रहमत और आसानी को बयान करता है।

✅ [262] बिना इल्म के फ़ैसले देने वालों के लिए चेतावनी

कुछ लोग ग़लत फ़ैसले देते हैं—जैसे बुतों के नाम का मांस हलाल कहना और अल्लाह के नाम पर ज़बह़ किए गए जानवर को हराम बताना। ऐसे लोग नफ़्स और ख्वाहिशात के मुताबिक़ फ़ैसले देकर लोगों को गुमराह करते हैं। यह आयत ऐसे गुमराह आलिमों के लिए सख़्त चेतावनी है।

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