Transliteration: (Wa zaroo zaahiral ismi wa baatinah; innal lazeena yaksiboonal ismaa sa yujzawna bimaa kaanoo yaqtarifoon)
यह हुक्म ऐसे तमाम गुनाहों को छोड़ने का है जो खुले आम किए जाएं या छुपकर, चाहे वह हाथ-पाँव के अमल हों या दिल, नीयत और ख्वाहिश के गुनाह। हर हालत में, जाहिर और गुप्त, अल्लाह का डर होना ज़रूरी है।
यह चेतावनी है कि गुनाह पर डटे रहने वालों को जल्द सज़ा मिलेगी—चाहे वह बद्र के मैदान में हो, मौत के वक़्त, या क़यामत के दिन। जो गुनाह जानबूझकर किए जाएं, उनकी सज़ा से कोई नहीं बच सकता।
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