कुरान - 6:115 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

115
وَتَمَّتۡ كَلِمَتُ رَبِّكَ صِدۡقٗا وَعَدۡلٗاۚ لَّا مُبَدِّلَ لِكَلِمَٰتِهِۦۚ وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ

Transliteration: (Wa tammat Kalimatu Rabbika sidqanw wa 'adlaa; laa mubaddila li Kalimaatih; wa Huwas Samee'ul 'Aleem)

और पूरा है तुम्हारे रब का कलाम सच्चाई और इंसाफ़ [251] में। कोई नहीं जो उसके कलाम को बदल सके [252]। और वही सब कुछ सुनने वाला, जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 115 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 115 की तफ़्सीर

✅ [251] तुम्हारे रब का कलाम का मतलब

"तुम्हारे रब का कलाम" से मुराद या तो वह फ़ैसला है जो अल्लाह तआला ने मुसलमानों और काफ़िरों के बीच किया, या फिर आसमानी किताबें, जिनमें सबसे बढ़कर कुरआन मजीद है। मुराद यह है कि अल्लाह का कलाम सच्चाई और इंसाफ़ में मुकम्मल है।

✅ [252] कुरआन की तब्दीली नामुमकिन

इसका मतलब है कि कुरआन करीम एक सच्ची किताब है और क़ियामत तक कोई उसकी एक भी आयत को बदल नहीं सकता। यहाँ नस्क़ (अभिन्यास) का ज़िक्र नहीं, क्योंकि कोई इंसान किसी आयत को बदलने का इख़्तियार नहीं रखता — नस्क़ सिर्फ़ अल्लाह के हुक्म से होता है, जैसे डॉक्टर मरीज़ की हालत देखकर दवा का नुस्ख़ा बदल देता है। अगर मरीज़ अपनी तरफ़ से दवा बदल दे, तो वह नुक़सानदेह और ज़ुल्म है।

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