Transliteration: (Wa izaa jaaa'athum Aayatun qaaloo lan nu'mina hatta nu'taa misla maaa ootiya Rusulul laah; Allahu a'alamu haisu yaj'alu Risaalatah; sa yuseebul lazeena ajramoo saghaarun 'indal laahi wa 'azaabun shadeedum bimaa kaanoo yamkuroon)
जब सरदार और अमीर लोग गुमराह हो जाते हैं, तो वे अपनी क़ौम में फ़साद फैलाते हैं। अल्लाह ने फ़रमाया: “जब हम किसी बस्ती को हलाक करने का इरादा करते हैं, तो हम उसके अमीरों को हुक्म देते हैं, फिर वे उसमें गुनाह करते हैं” [17:16]। नेक नेतृत्व से समाज में सुधार आता है, लेकिन अक्सर अमीर लोग ऐश-ओ-इशरत और गुनाह में डूबकर बर्बादी का कारण बनते हैं। ग़रीब लोग अक्सर दीन को ज़्यादा कबूल करते हैं।
क़ुरैश ने कोशिश की कि कोई भी हज़रत मुहम्मद ﷺ तक न पहुँचे, लेकिन इस्लाम और ज़्यादा फैलता गया। उनकी चालें नबी ﷺ को नहीं बल्कि ख़ुद उनके लिए नुक़सानदेह साबित हुईं, और वे समझ भी न सके कि उनका विरोध ही इस्लाम के फैलाव को तेज़ कर रहा है।
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