Transliteration: (Famai yuridil laahu ai yahdiyahoo yashrah sadrahoo lil islaami wa mai yurid ai yudillahoo yaj'al sadrahoo daiyiqan harajan ka annamaa yassa' 'adu fis samaaa'; kazaalika yaj'alul laahur rijsa 'alal lazeena laa yu'minoon)
जब अल्लाह किसी को हिदायत देता है, तो उसके दिल में नूर डाल देता है, जिससे वह ईमान को स्वीकार करने वाला बन जाता है। नबी ﷺ ने फ़रमाया कि ऐसे दिल की निशानियाँ हैं — दुनिया से बे-रग़्बती, आख़िरत की चाहत, और मौत आने से पहले उसके लिए तैयारी। सच्चा ईमान अल्लाह की तरफ़ से एक तोहफ़ा है।
जिसका सीना तंग हो, उसके लिए ईमान बोझ बन जाता है, जबकि दुनियावी काम आसान लगते हैं। ऐसा दिल कुफ़्र का ठिकाना बन जाता है और रूहानी तरक़्क़ी की क़ाबिलियत खो देता है। यह कोई मजबूरी नहीं, बल्कि लगातार गुनाहों और हठधर्मी का नतीजा है, जैसे लोहा ज़ंग खाकर खराब हो जाता है।
दिल की सख़्ती अल्लाह की तरफ़ से एक सज़ा है, जो लगातार नाफ़रमानी करने वालों पर पड़ती है। यह इंसान को दुनिया में गुमराही और आख़िरत में अज़ाब की तरफ़ ले जाती है। रूहानी नर्मी से महरूम हो जाना, कुफ़्र और गुनाह का सबसे बड़ा नतीजा है।
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