Transliteration: (Lahum daarus salaami 'inda Rabbihim wa huwa waliyyuhum bimaa kaanoo ya'maloon)
यह आयत साबित करती है कि जन्नत उसके रहने वालों की हमेशा की मिल्कियत है, क्योंकि “उनके लिए” का लफ़्ज़ असली और हमेशा का मालिकाना हक़ बताता है, न कि अस्थायी ठहराव।
यह मालिकाना हक़ दुनिया से लेकर हमेशा तक रहेगा, और अल्लाह खुद वहाँ उनका सारसंरक्षक और दोस्त होगा।
जन्नत को सलामती का घर इसलिए कहा गया है क्योंकि वहाँ हर किस्म की बीमारी, डर, मौत और तकलीफ़ से पूरी तरह सुरक्षा है।
जन्नत में दाख़िला नेक कामों से जुड़ा है, जैसा कि “उनके उन कामों के बदले” से ज़ाहिर है।
लेकिन नाबालिग, पागल और नए मुसलमान जो ईमान लाने के बाद तुरंत मर जाएँ, वो भी अल्लाह की रहमत से जन्नत में दाख़िल होंगे।
गुनहगार भी नबी ﷺ के नेक अमल की बरकत से फायदा पाएँगे, जैसे भिखारी सख़ावत करने वाले के माल में हिस्सा पाते हैं — “और उनके माल में एक तय हिस्सा होता है…” [70:24–25]।
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