कुरान - 6:129 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

129
وَكَذَٰلِكَ نُوَلِّي بَعۡضَ ٱلظَّـٰلِمِينَ بَعۡضَۢا بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ

Transliteration: (Wa kazaalika nuwallee ba'daz zaalimeena ba'dam bimaa kaanoo yaksiboon)

और इसी तरह हम कुछ ज़ालिमों को दूसरों पर मुक़र्रर कर देते हैं, उनके उन अमलों की वजह से जो उन्होंने कमाए [288]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 129 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 129 की तफ़्सीर

✅ [288] ज़ालिम हुक़्मरान लोगों के आमाल का नतीजा

यह आयत बताती है कि ज़ालिम हाकिम अल्लाह की तरफ़ से सज़ा के तौर पर दिए जाते हैं, और यह लोगों के अपने गुनाहों की वजह से होता है।
यज़ीद का ज़ुल्म हज़रत इमाम हुसैन (रज़ि.) पर ग़ालिब नहीं आया — बल्कि उसका बुरा राज मिटा दिया गया, जैसे हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) फिरऔन पर और हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) नमरूद पर ग़ालिब आए।
फ़ासिद हुक़ूमत लोगों के इकट्ठे गुनाहों से पैदा होती है, और अगर कोई क़ौम नेक हुक़्मरान चाहती है, तो उसे नेक आमाल अपनाने होंगे।
हुक़्मरानी हमेशा क़ौम की नैतिक हालत का आईना होती है।

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