Transliteration: (Wa kazaalika nuwallee ba'daz zaalimeena ba'dam bimaa kaanoo yaksiboon)
यह आयत बताती है कि ज़ालिम हाकिम अल्लाह की तरफ़ से सज़ा के तौर पर दिए जाते हैं, और यह लोगों के अपने गुनाहों की वजह से होता है।
यज़ीद का ज़ुल्म हज़रत इमाम हुसैन (रज़ि.) पर ग़ालिब नहीं आया — बल्कि उसका बुरा राज मिटा दिया गया, जैसे हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) फिरऔन पर और हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) नमरूद पर ग़ालिब आए।
फ़ासिद हुक़ूमत लोगों के इकट्ठे गुनाहों से पैदा होती है, और अगर कोई क़ौम नेक हुक़्मरान चाहती है, तो उसे नेक आमाल अपनाने होंगे।
हुक़्मरानी हमेशा क़ौम की नैतिक हालत का आईना होती है।
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