Transliteration: (Yaa ma'sharal jinni wal insi alam ya'tikum Rusulum minkum yaqussoona 'alaikum Aayaatee wa yunziroonakum liqaaa'a Yawmikum haazaa; qaaloo shahidnaa 'alaaa anfusinaa wa gharrat humul hayaatud dunyaa wa shahidooo 'alaa anfusihim annahum kaanoo kaafireen)
यह ख़िताब जिन्न और इंसानों दोनों से है, लेकिन “तुम्ही में से” का मतलब यह है कि पैग़म्बर सिर्फ़ इंसानों में से भेजे गए, जैसा कि कुरआन में है — “हमने आप से पहले सिर्फ़ मर्दों को भेजा” [16:43]।
इससे इंसान की बढ़त जिन्न पर साबित होती है।
जैसे कुरआन में मोती और मरजान “दोनों” समुद्रों से बताए गए [55:22], इसका मतलब हुक्मरानी है, न कि असल पैदाइश।
पहले के उम्मतों में पैग़म्बर जिन्न की तरफ़ भी भेजे गए, लेकिन हमारे नबी ﷺ तमाम इंसानों और जिन्न के लिए आलमी रसूल हैं।
कुफ़्फ़ार पहले यह इंकार करेंगे कि उनके पास पैग़म्बर आए थे, लेकिन उनके अंग-औज़ा ख़ुद गवाही देंगे, जिससे इंकार की गुंजाइश नहीं बचेगी।
उसके बाद वे अपने कुफ़्र का एतराफ़ करेंगे और समझेंगे कि दुनियावी धोखे ने उन्हें अंधा कर दिया था।
यह आयत बताती है कि इसमें कोई तअ़रुज़ नहीं — पहले इंकार, फिर मजबूरन इक़रार होगा।
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