कुरान - 6:132 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

132
وَلِكُلّٖ دَرَجَٰتٞ مِّمَّا عَمِلُواْۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَٰفِلٍ عَمَّا يَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Wa likullin darajaatum mimmaa 'amiloo; wa maa Rabbuka bighaafilin 'ammaa ya'maloon)

और हर एक के लिए उसके किए हुए आमाल के मुताबिक़ दरजात [293] होंगे, और तुम्हारा रब उनके कामों से बे-ख़बर नहीं है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 132 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 132 की तफ़्सीर

✅ [293] जन्नत और जहन्नम में दर्जे आमाल के मुताबिक़

यह आयत बयान करती है कि अज्र और अज़ाब बराबर नहीं होंगे, बल्कि हर शख़्स के आमाल के मुताबिक़ होंगे।
जन्नत वालों के लिए उनके आमाल की क्वालिटी और मात्रा के हिसाब से अलग-अलग दर्जात और नेमतें होंगी।
इसी तरह जहन्नम वालों के लिए गुनाहों की क़िस्म और दर्जे के मुताबिक़ अलग-अलग सख़्तियां और अज़ाब होंगे।

यह भी मुमकिन है कि एक ही नेक अमल अलग हालात में अलग अज्र रखे — कभी वही अमल ज्यादा अज्र का हक़दार बनता है, अगर वह ज्यादा मेहनत, नेक नियत या किसी खास ज़रूरत के वक़्त किया जाए।

हदीस से मालूम होता है कि अज्र अक़्ल और समझदारी के हिसाब से भी है — जितनी ज्यादा क़ाबिलियत और इल्म होगा, उतना ही हिसाब ज्यादा सख़्त होगा।

इससे साबित हुआ कि इस्लाम नियत, हालत, ज़रूरत और क़ाबिलियत सबको ध्यान में रखकर अज्र व सज़ा तय करता है।
और अल्लाह तआला हर छोटे-बड़े अमल से पूरी तरह वाक़िफ़ है।

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