Transliteration: (Inna maa too'adoona la aatinw wa maaa antum bimu'jizeen)
यह आयत बताती है कि अल्लाह ने जो वादा किया है – चाहे वह मौत हो, क़ियामत हो या फिर अज़ाब (सज़ा) – वह हर हाल में अपने वक़्त पर पूरा होकर रहेगा।
इसमें कोई देरी हो तो उसे झुठलाना नहीं चाहिए, बल्कि उसे यक़ीनी समझकर उसकी तैयारी करनी चाहिए।
अल्लाह कमज़ोर नहीं है, वह कभी ख़िलाफ़-ए-वादा नहीं करता और न ही कोई उसकी क़ुदरत से बचकर निकल सकता है।
यह आयत इंसान को तकब्बुर छोड़ने, अल्लाह से डरने और नेक़ी अपनाने की दावत देती है, क्योंकि अल्लाह के फ़ैसले से भागने की कोई जगह नहीं।
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