Transliteration: (Qul yaa qawmi' maloo 'alaa makaanatikum innee 'aamilun fasawfa ta'lamoona man takoonu lahoo 'aaqibatud daar; innahoo laa yuflihuz zaalimoon)
यह जुमला ग़फ़लत या गुनाह की इजाज़त नहीं है, बल्कि अल्लाह के ग़ज़ब और इनज़ार का एलान है।
जैसे कुरआन में है: “जो चाहे ईमान लाए और जो चाहे कुफ़्र करे” [18:29]।
यह हक़ीक़त में कुफ़्फ़ार को चुनौती है कि तुम अपने रास्ते पर चलो, लेकिन नतीजा ज़रूर सामने आएगा।
हालाँकि ईमान वालों और कुफ़्फ़ार का हश्र पहले से मालूम है, मगर इस आयत में उसका ज़ाहिरी और आमली तौर पर प्रकट होना मुराद है – चाहे वह क़ियामत के दिन हो या फिर दुनियावी अज़ाब के ज़रिये।
आख़िरकार यह साबित होकर रहेगा कि ज़ालिम कभी फ़लाह नहीं पाएँगे।
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