कुरान - 6:135 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

135
قُلۡ يَٰقَوۡمِ ٱعۡمَلُواْ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمۡ إِنِّي عَامِلٞۖ فَسَوۡفَ تَعۡلَمُونَ مَن تَكُونُ لَهُۥ عَٰقِبَةُ ٱلدَّارِۚ إِنَّهُۥ لَا يُفۡلِحُ ٱلظَّـٰلِمُونَ

अनुवाद -

कह दो, “ऐ मेरी क़ौम! तुम अपनी स्थिति के मुताबिक़ अमल करो, मैं भी (अपने रास्ते पर) अमल कर रहा हूँ [296]। जल्द ही तुम जान लोगे कि आख़िरत का अंजाम किसके लिए है [297]। बेशक ज़ालिम कभी कामयाब नहीं होंगे।”

सूरह अल-अनाम आयत 135 तफ़सीर


📖 सूरा अल-अनआम – आयत 135 की तफ़्सीर

✅ [296] अल्लाह का सख़्त इनज़ार, गुनाह की इजाज़त नहीं

यह जुमला ग़फ़लत या गुनाह की इजाज़त नहीं है, बल्कि अल्लाह के ग़ज़ब और इनज़ार का एलान है।
जैसे कुरआन में है: “जो चाहे ईमान लाए और जो चाहे कुफ़्र करे” [18:29]।
यह हक़ीक़त में कुफ़्फ़ार को चुनौती है कि तुम अपने रास्ते पर चलो, लेकिन नतीजा ज़रूर सामने आएगा।

✅ [297] आख़िरी नतीजा हक़ और बातिल को ज़ाहिर करेगा

हालाँकि ईमान वालों और कुफ़्फ़ार का हश्र पहले से मालूम है, मगर इस आयत में उसका ज़ाहिरी और आमली तौर पर प्रकट होना मुराद है – चाहे वह क़ियामत के दिन हो या फिर दुनियावी अज़ाब के ज़रिये।
आख़िरकार यह साबित होकर रहेगा कि ज़ालिम कभी फ़लाह नहीं पाएँगे

 

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