कुरान - 6:136 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

136
وَجَعَلُواْ لِلَّهِ مِمَّا ذَرَأَ مِنَ ٱلۡحَرۡثِ وَٱلۡأَنۡعَٰمِ نَصِيبٗا فَقَالُواْ هَٰذَا لِلَّهِ بِزَعۡمِهِمۡ وَهَٰذَا لِشُرَكَآئِنَاۖ فَمَا كَانَ لِشُرَكَآئِهِمۡ فَلَا يَصِلُ إِلَى ٱللَّهِۖ وَمَا كَانَ لِلَّهِ فَهُوَ يَصِلُ إِلَىٰ شُرَكَآئِهِمۡۗ سَآءَ مَا يَحۡكُمُونَ

Transliteration: (Wa ja'aloo lillaahi mimmaa zara-a minal harsi walan'aami naseeban faqaaloo haazaa lillaahi biza'mihim wa haaza lishurakaa'inaa famaa kaana lishurakaaa'ihim falaa yasilu ilal laahi wa maa kaana lillaahi fahuwa yasilu ilaa shurakaaa'ihim; saaa'a maa yahkumoon)

और उन्होंने जो कुछ अल्लाह ने खेती से पैदा किया और मवेशी बनाए, उसमें से कह दिया: “यह अल्लाह के लिए है – उनकी अपनी ख़्वाहिश के मुताबिक़ – और यह हमारे शरीक़ों के लिए है [298]। फिर जो हिस्सा उनके शरीक़ों के लिए होता, वह अल्लाह तक नहीं पहुँचता [299], लेकिन जो हिस्सा अल्लाह के लिए होता, वह उनके शरीक़ों तक पहुँच जाता। कितना बुरा फ़ैसला है जो वे करते हैं [300]।” (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 136 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 136 की तफ़्सीर

✅ [298] मुशरिक़ों की झूठी तक़सीम

यह आयत उन मुशरिक़ों की बुनियादहीन रस्म की नफ़ी करती है, जिन्होंने अपनी पैदावार और मवेशी का हिस्सा बाँट लिया – कुछ अल्लाह के नाम पर और कुछ अपने बुतों के नाम पर।
कुरआन ने इसे “उनकी ख़्वाहिश” कहा, यानी ऐसा अमल जिसका अल्लाह ने हुक्म नहीं दिया, बल्कि यह रद्द और बेकार है।

✅ [299] तक़सीम में नाइंसाफ़ी और रियाकारी

मुशरिक़ लोग अल्लाह के हिस्से को मेहमानों और ग़रीबों के लिए रखते और बुतों के हिस्से को अपने लिए।
अगर कभी अल्लाह का हिस्सा ग़लती से बुतों को मिल जाता, तो वह उसे वहीं छोड़ देते, लेकिन अगर बुतों का हिस्सा अल्लाह की तरफ़ चला जाता तो उसे रोक लेते।
यह उनकी नाइंसाफ़ी और दोग़लापन था, जो उनकी रूहानी गिरावट को दिखाता है।

✅ [300] अमल शिर्की था, पैदावार नहीं

अल्लाह ने उनके इस अमल पर ग़ज़ब का इज़हार किया, मगर उनकी पैदावार को हराम क़रार नहीं दिया।
असल में शिर्क उनका हिस्सों को बुतों के नाम पर करना था, न कि खोराक़ या जानवर ख़ुद।
अगर वही जानवर अल्लाह के नाम पर ज़बह किए जाएँ, तो वह हلال और पाक हो जाते हैं।

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