Transliteration: (Wa qaaloo haaziheee an'aamunw wa harsun hijrun laa yat'amuhaaa illaa man nashaaa'u biza'mihim wa an'aamun hurrimat zuhooruhaa wa an'aamul laa yazkuroonas mal laahi 'alaihaf tiraaa'an 'alaiyyh; sa yajzeehim bimaa kaanoo yaftaroon)
मुशरिक़ लोग कहते कि कुछ खेती और मवेशी हराम हैं, और उनमें से सिर्फ़ वही खा सकते हैं जिन्हें वे खुद पसंद करें।
अल्लाह ने साफ़ कर दिया कि ये उनकी बनाई हुई बातें हैं, अल्लाह ने इन्हें हराम नहीं किया।
वे अपनी फ़सलें और माल बुतों के नाम पर वक़्फ़ कर देते, और उसे सिर्फ़ मंदिर वालों और बुतपरस्तों में बाँटते।
यह सब उनका ख़याली अंधविश्वास था, जिसका हक़ीक़त में कोई दलील नहीं।
उन्होंने कुछ जानवरों को मुक़द्दस ठहराया, जैसे: बहीरा, साएबा और हामी –
जिन्हें बुतों के नाम पर छोड़ दिया जाता, न उन पर सवारी करते और न काम में लेते।
यह बिल्कुल बेबुनियाद और शिर्की रिवायत थी।
उनके झूठ में यह सब शामिल था:
ये सब काम अल्लाह पर झूठ बाँधने के बराबर हैं।
अल्लाह ने वादा किया कि वह उन्हें इन मनगढ़ंत बातों की सज़ा देगा।
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