Transliteration: (Wa Rabbukal ghaniyyu zur rahmah; iny yasha' yuz hibkum wa yastakhlif mim ba'dikum maa yashaaa'u kamaaa ansha akum min zurriyyati qawmin aakhareen)
यह आयत बताती है कि अल्लाह अपनी मख़लूक़ का मोहताज नहीं, बल्कि वह ग़नी (बेनियाज़) और रहमत वाला है।
अगर वह चाहे तो किसी क़ौम को मिटा दे और उनकी जगह दूसरी क़ौम ले आए, जैसे कि उसने पहले की क़ौमें मिटाकर बाद वालों को पैदा किया।
इसमें इशारा है कि मौत एक तय वक़्त पर आती है और इंसान के जाने के बाद उसकी जगह उसकी औलाद या दूसरी नस्लें ले लेती हैं।
यह दुनिया फ़ानी है, इसलिए किसी को अपने माल, दौलत या ताक़त पर घमंड नहीं करना चाहिए।
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