कुरान - 6:133 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

133
وَرَبُّكَ ٱلۡغَنِيُّ ذُو ٱلرَّحۡمَةِۚ إِن يَشَأۡ يُذۡهِبۡكُمۡ وَيَسۡتَخۡلِفۡ مِنۢ بَعۡدِكُم مَّا يَشَآءُ كَمَآ أَنشَأَكُم مِّن ذُرِّيَّةِ قَوۡمٍ ءَاخَرِينَ

Transliteration: (Wa Rabbukal ghaniyyu zur rahmah; iny yasha' yuz hibkum wa yastakhlif mim ba'dikum maa yashaaa'u kamaaa ansha akum min zurriyyati qawmin aakhareen)

और तुम्हारा रब बेनियाज़ है, रहमत वाला है। अगर वह चाहे तो तुम्हें उठा ले और तुम्हारी जगह दूसरों को ले आए, जैसा कि उसने तुम्हें औरों की औलाद से पैदा किया है [294]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 133 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 133 की तफ़्सीर

✅ [294] अल्लाह जब चाहे क़ौमों को बदल देता है

यह आयत बताती है कि अल्लाह अपनी मख़लूक़ का मोहताज नहीं, बल्कि वह ग़नी (बेनियाज़) और रहमत वाला है।
अगर वह चाहे तो किसी क़ौम को मिटा दे और उनकी जगह दूसरी क़ौम ले आए, जैसे कि उसने पहले की क़ौमें मिटाकर बाद वालों को पैदा किया।

इसमें इशारा है कि मौत एक तय वक़्त पर आती है और इंसान के जाने के बाद उसकी जगह उसकी औलाद या दूसरी नस्लें ले लेती हैं।
यह दुनिया फ़ानी है, इसलिए किसी को अपने माल, दौलत या ताक़त पर घमंड नहीं करना चाहिए।

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