कुरान - 6:123 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

123
وَكَذَٰلِكَ جَعَلۡنَا فِي كُلِّ قَرۡيَةٍ أَكَٰبِرَ مُجۡرِمِيهَا لِيَمۡكُرُواْ فِيهَاۖ وَمَا يَمۡكُرُونَ إِلَّا بِأَنفُسِهِمۡ وَمَا يَشۡعُرُونَ

Transliteration: (Wa kazaalika ja'alnaa fee kulli qaryatin akaabira mujrimeehaa liyamkuroo feehaa wa maa yamkuroona illaa bi anfusihim wa maa yash'uroon)

और इसी तरह, हमने हर बस्ती में उसके गुनहगारों के सरदार बना दिए [273], ताकि वे उसमें षड्यंत्र करें। वे षड्यंत्र नहीं करते मगर अपने ही ख़िलाफ़, और उन्हें इसका एहसास नहीं होता [274]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 123 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 123 की तफ़्सीर

✅ [273] गुमराह सरदार बर्बादी का कारण होते हैं

जब सरदार गुमराह होते हैं, तो अपनी कौम में फ़साद फैलाते हैं। अल्लाह ने फ़रमाया: “जब हम किसी बस्ती को बर्बाद करना चाहते हैं, तो उसके ऐशपरस्तों को हुक्म देते हैं, फिर वे उसमें नाफ़रमानी करते हैं” [17:16]। नेक लीडर क़ौम की इस्लाह करते हैं, जबकि अधिकतर दौलतमंद सरदार नैतिक गिरावट का कारण बनते हैं। ग़रीब लोग दीन को ज़्यादा आसानी से अपनाते हैं, जबकि ऐशपरस्ती और गुनाह में डूबे लोग रद्द करते हैं।

✅ [274] हक़ के ख़िलाफ़ चालें चालने वाले खुद को नुक़सान देते हैं

क़ुरैश ने लोगों को नबी ﷺ तक पहुँचने से रोकने की कोशिश की, मगर इस्लाम फैलता गया। उनकी साज़िशें सिर्फ़ उन्हीं के लिए नुक़सानदेह साबित हुईं। वे समझ न पाए कि उनकी रुकावटें ही इस्लाम की तेज़ी से फैलने का सबब बन रही थीं।

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