कुरान - 6:153 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

153
وَأَنَّ هَٰذَا صِرَٰطِي مُسۡتَقِيمٗا فَٱتَّبِعُوهُۖ وَلَا تَتَّبِعُواْ ٱلسُّبُلَ فَتَفَرَّقَ بِكُمۡ عَن سَبِيلِهِۦۚ ذَٰلِكُمۡ وَصَّىٰكُم بِهِۦ لَعَلَّكُمۡ تَتَّقُونَ

Transliteration: (Wa annna haazaa Siraatee mustaqeeman fattabi'oohu wa laa tattabi'us subula fatafarraqa bikum 'an sabeelih; zaalikum wassaakum bihee la'allakum tattaqoon)

और यही मेरा सीधा रास्ता है, सो उसी का अनुसरण करो [362]। और दूसरे रास्तों के पीछे मत चलो, वरना वे तुम्हें उसके रास्ते से अलग कर देंगे [363]। यही उसने तुम्हें ताकीद की है, ताकि तुम तक़वा हासिल करो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 153 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 153 की तफ़्सीर

✅ [362] सीधा रास्ता (सिरातुल मुस्तक़ीम)

सीधा रास्ता वह मुकम्मल इस्लामी ज़िन्दगी का निज़ाम है, जिसमें शामिल हैं:

  • अक़ीदा (सही ईमान और विश्वास)
  • इबादत (सही तौर पर बंदगी)
  • मुआमलात (इंसाफ़ी कारोबार और लेन-देन)
  • हुक़ूक़ुल इबाद (लोगों के हक़ की पाबंदी)

इनमें से किसी एक में भी कोताही गुमराही का कारण बन जाती है। इबादत और इंसानी बर्ताव दोनों मिलकर ही असली इस्लामी ज़िन्दगी बनाते हैं।

✅ [363] दूसरे रास्तों से बचने की चेतावनी

दूसरे रास्ते मुराद हैं:

  • फ़िरक़ाबंदी
  • बिदअत (नवाचार)
  • ख़्वाहिशात-ए-नफ़्स
  • और अल्लाह की हिदायत के ख़िलाफ़ हर नज़रिया या तरीका

छोटी-सी ग़लती या ग़फ़लत भी धीरे-धीरे बड़ी गुमराही तक पहुँचा देती है। सुन्नत को छोड़ना फ़र्ज़ तक के छोड़ने का रास्ता बन सकता है। इसी तरह मुआमलात में ज़ुल्म इबादत को भी बेकार कर सकता है।

✅ नतीजा-ए-हिकमत

यह आयत एक सख़्त इलाही हुक्म है कि मोमिनीन सिर्फ़ एक महफ़ूज़ और हिफ़ाज़तशुदा रास्ते पर चलें—जो अल्लाह ने उतारा है। यही रास्ता उन्हें तक़वा (अल्लाह-तआला का डर और परहेज़गारी) तक पहुँचाता है, जो इस्लाम की असल मंज़िल है।

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