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وَهَٰذَا كِتَٰبٌ أَنزَلۡنَٰهُ مُبَارَكٞ فَٱتَّبِعُوهُ وَٱتَّقُواْ لَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ
Transliteration: (Wa haazaa Kitaabun anzalnaahu Mubaarakun fattabi'oohu wattaqoo la'al lakum turhamoon)
और यह वह किताब है जिसे हमने नाज़िल किया, यह मुबारक (बर्क़त वाली) [366] है। तो तुम इसकी पैरवी करो और अल्लाह से डरते रहो, ताकि तुम पर रहमत हो [367]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)
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