कुरान - 6:157 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

157
أَوۡ تَقُولُواْ لَوۡ أَنَّآ أُنزِلَ عَلَيۡنَا ٱلۡكِتَٰبُ لَكُنَّآ أَهۡدَىٰ مِنۡهُمۡۚ فَقَدۡ جَآءَكُم بَيِّنَةٞ مِّن رَّبِّكُمۡ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٞۚ فَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّن كَذَّبَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ وَصَدَفَ عَنۡهَاۗ سَنَجۡزِي ٱلَّذِينَ يَصۡدِفُونَ عَنۡ ءَايَٰتِنَا سُوٓءَ ٱلۡعَذَابِ بِمَا كَانُواْ يَصۡدِفُونَ

Transliteration: (Aw taqooloo law annaaa unzila 'alainal kitaabu lakunnaaa ahdaa minhum; faqad jaaa'akum baiyinatum mir Rabbikum wa hudanw wa rahmah; faman azlamu mimman kazzaba bi Aayaatil laahi wa sadafa 'anhaa; sanajzil lazeena yasdifoona 'an Aayaatinaa sooo'al 'azaabi bimaa kaanoo yasdifoon)

या (तुम यह न कहो कि) अगर यह किताब हम पर नाज़िल होती तो हम उनसे ज़रूर ज़्यादा हिदायतयाफ़्ता होते। तो तुम्हारे पास तो तुम्हारे रब की तरफ़ से एक ख़ुला प्रमाण आ चुका है, और हिदायत और रहमत [370] भी। तो उस शख़्स से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह की आयतों को झुठलाए और उनसे मुँह मोड़ ले? बहुत जल्द हम उन लोगों को जो हमारी आयतों से मुँह मोड़ते हैं, एक सख़्त अज़ाब [371] का मज़ा चखाएँगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 157 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 157 की तफ़्सीर

✅ [369] वजह-ए-नुज़ूल: झूठा दावा-ए-हिदायत

  • कुछ कुफ़्फ़ार यहूद व नसरानी पर फ़ज़ीलत जताते हुए कहते थे:
    “अगर किताब हम पर नाज़िल होती तो हम ज़रूर उस पर अमल में उनसे बढ़कर होते।”
  • लेकिन जब क़ुरआन उन पर उतरा, तो उन्होंने उसे ठुकरा दिया।
  • सबक़: बिना ताबेदारी के अक़्ल पर घमंड करना गुमराही है।

✅ [370] क़ुरआन – साफ़ दलील, हिदायत और रहमत

  • क़ुरआन अल्लाह की तरफ़ से एक ख़ुला प्रमाण (बैय्यिना) है:
    • हिदायत में वाज़ेह
    • पैग़ाम में आलमी (सार्वभौमिक)
    • रहमत से भरपूर
  • जिस तरह रसूल ﷺ सब इंसानों के लिए भेजे गए, उसी तरह क़ुरआन भी तमाम जहानों के लिए किताब है।
  • अब इनकार या ग़फ़लत का कोई बहाना बाक़ी नहीं रहा।

✅ [371] सबसे बड़ा ज़ालिम – आयतों का इंकार करने वाला

  • अल्लाह की साफ़ निशानियों को जानबूझकर ठुकराना सबसे बड़ी ज़ुल्म है।
  • ऐसा शख़्स दरअस्ल अपने ही लिए तबाही लाता है।
  • “मुँह मोड़ना” तीन तरह का हो सकता है:
    • ज़बानी इनकार करना
    • बे-परवाह रहना
    • हक़ मानकर भी ताबेदारी से इंकार करना

✅ [372] कुफ़्र की दो क़िस्में

  • इनकार करना (रसूल ﷺ को झुठलाना)।
  • क़ुबूल करने से इंकार करना (सच जानकर भी न मानना)।
  • दोनों सूरतें कुफ़्र में शामिल हैं।

✅ [373] अज़ाब – फ़ौरी या आख़िरती

  • यह सख़्त अज़ाब हो सकता है:
    • दुनियावी शिकस्त (जैसे बद्र की लड़ाई)
    • क़ब्र का अज़ाब
    • या आख़िरत का दर्दनाक अज़ाब

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